<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-3617770739116937767</id><updated>2011-12-15T20:39:33.362-08:00</updated><category term='नक्सलवाद समस्या या विकल्प'/><category term='women reservation'/><category term='तो दूर तलक जायेगी'/><category term='विकास की राजनीति में फँसा बिहार'/><category term='किसका वजूद कितना पक्‍का राममंदिर या बाबरी मस्जिद का?'/><category term='बात निकली है'/><category term='यह जो देश है मेरा'/><title type='text'>वन्दे मातरम्</title><subtitle type='html'>Karma is selfless service, the path by which the mind is most quickly purified and its limits transcended. The karma yogi works hard, both physically and mentally. He seeks to eliminate the ego and its attachments, to serve humanity without expecting rewards, and to see unity in diversity . This enables him to tune to the one underlying divine essence that dwells within all beings.</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>mukesh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13668566544256037971</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/-wI9zXReltOU/TbKZvak746I/AAAAAAAAAQQ/yyW68uqMV8E/s220/asd.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>16</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3617770739116937767.post-2842598221531050874</id><published>2011-09-21T09:20:00.000-07:00</published><updated>2011-09-21T09:20:21.325-07:00</updated><title type='text'>अन्‍ना की हुंकार से लोकतंत्र हुआ मजबूत</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-nqutXtIIc7M/TnoMHe6cwjI/AAAAAAAAASQ/yv7qZ3WL5Po/s1600/we.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="150" src="http://1.bp.blogspot.com/-nqutXtIIc7M/TnoMHe6cwjI/AAAAAAAAASQ/yv7qZ3WL5Po/s200/we.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;"मैं अन्‍ना हूं, तुम अन्‍ना हो अब ये सारा देश अन्‍ना हो चुका है, आखिरकार ये अन्‍ना कौन है ? "&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #cc0000;"&gt;74 वर्ष का एक अवकाश प्राप्त सैनिक या 74 वर्ष का समाजसेवी या विकासशील भारत का एक ऐसा सपूत जिसने लोगों में एक नयी प्रेरणा, एक नई ऊर्जा प्रदान करने का बीड़ा उठाने वाला ऐसा सिपाही जो रहता सबके सामने, परन्तु दिखता नहीं है ।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp; जिस जनआन्दोलन का नाम भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मुहिम बताया जा रहा है, जिसका नाम लोकपाल कानून बनाने के लिए सार्थक प्रयास बताया जा रहा है, उसमें मुझे कहीं भी किसी भी तरह से यह बात समझ में नहीं आ रही की, क्या भ्रष्टाचार 15 दिन के जनआन्दोलन से मिटाया या समाप्त किया जा सकता है? या क्या रामलीला मैदान से आह्वान कर पूरे भारत को जगाया जा सकता है ? हमें ही नहीं बल्कि आपको भी शायद ऐसा न लगे ? क्योंकि यह आन्दोलन ऐसा नहीं है । न ही इसका कोई ऐसा आधार है, जो भ्रष्टाचार को लोकपाल के तहत देश से मिटाया जा सके । मैं जानना चाहूंगा आपसे और उन तमाम देशवासियों से जो अपना योगदान इस आन्दोलन में क्या पाने के लिए कर रहे हैं । आप शायद मेरे इन तमाम प्रश्नों से यह सोच रहे होंगे कि मैं आशावादी नहीं हूं, या मुझको इस आन्दोलन के नतीजे और प्रभाव का अनुमान नहीं &amp;nbsp;है, तो यह गलत है, मैं सिर्फ यह जानना चाहता हूं कि क्या आप सभी इस आन्दोलन से सन्तुष्ट हैं या नहीं ? &lt;i&gt;&lt;b&gt;अगर हैं तो क्युं और नहीं तो क्यूं ?&lt;/b&gt;&lt;/i&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह आन्दोलन एक व्यक्‍ति विशेष का नहीं है, एक समिति तक ही नहीं सीमित है, परन्तु यह इतना व्यापक और हजारों ऐसे नये मुद्दों को जन्म देने वाला है, जिसमें किसी व्यक्‍ति विशेष का योगदान महत्वपूर्ण होते हुए भी नहीं है । अगर इसका महत्व है तो इसलिए क्योंकि यह जनता को जागरूक करने का एक प्रयास अवश्य किया गया है ।&lt;br /&gt;एक बार सबको दूसरे की गलतियों को देखने का आभास अवश्य कराया है ?&amp;nbsp;चाहे वह मौजूदा सरकार की हो या पुलिस प्रशासन या किसी भी स्तर का क्यूं न हो !हम जहां ये नारे लगा रहे हैं कि “अब तो जनता जाग गई है" उसको &amp;nbsp;हम केवल कहने में विश्‍वास रख रहे हैं !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp; क्या वास्तव में जनता जाग गई है तो रात नहीं आयेगी ? या हमेशा के लिए जाग गई है ! क्या आज जिन नेताओं को मंचों से अभद्र और गवार बताया जा रहा है, वो वास्तव में उसे कल तक याद रख पायेंगे या नहीं ?&lt;br /&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;भाइयों हमारा इतिहास रहा है , कि हम रोज जागते और रोज सोते हैं । इसलिए यह आन्दोलन और मुद्दे जन्म लेते हैं ।&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-DYxvFgIUX2c/TnoNJJZZ4KI/AAAAAAAAASU/TxHPBsIjKpo/s1600/Image0173.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="200" src="http://1.bp.blogspot.com/-DYxvFgIUX2c/TnoNJJZZ4KI/AAAAAAAAASU/TxHPBsIjKpo/s200/Image0173.jpg" width="150" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; आज हम जिस आन्दोलन के तहत किसी विशेष तंत्र को कानून बनाने की मांग कर रहे हैं, वह कितना प्रभावशाली या भ्रष्टाचार निरोधक होगा यह तो समय ही बतायेगा, परन्तु एक बात तो अवश्य निकल कर सामने आयी है और वह है, जनता की अदालत की चौखट पर कोई भी सरकार, कोई भी नेता, कोई भी पार्टी बड़ी नहीं है, न ही उसकी मनमानी चलेगी ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हमलोग जो आम आदमी है, उसकी आवाज को बुलंद करने का एक रास्ता मिल गया है, जिससे कोई भी सरकार कोई भी जनप्रतिनिधि एक बार गलत काम करने से पहले अवश्य सोचेगा । दूसरी जो सबसे बड़ी उपलब्धि इस जनआन्दोलन की है वो है इसमें सरकार में शामिल लोगों तथा जनप्रतिनिधियों को समझने और परखने का मौका &amp;nbsp;।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस जनआन्दोलन से एक बार लोकतंत्र को मजबूती अवश्य मिली है, जिसमें यह कहा गया है, कि जनता सर्वोपरि है, और उसके अहित की बातें करने वालों को बख्शा नहीं जा सकता ।&lt;br /&gt;भाइयों आजादी मिल जाना ही महत्वपूर्ण नहीं होता, महत्वपूर्ण यह होता है कि, उस आजादी का उपभोग उस देश का हर एक नागरिक कर रहा है कि नहीं -&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp; संविधान में नये नियम कानून बना देने से ही किसी समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि जरूरी यह होता है कि वह कितना प्रभावशाली है ?अगर हम उदाहरण के तौर पर देखें तो बहुत सारे कानून हैं, जो भ्रष्टाचार को मुक्‍त करने के लिए सक्षम हैं, परन्तु होता क्या है, न हम भ्रष्टाचार मिटने देना चाहते हैं और न ही वैसे लोगों का समर्थन ही करते हैं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-DDAQakjhtZ4/TnoN9yJYWQI/AAAAAAAAASY/sAB-K_T3sPE/s1600/Image0169.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="240" src="http://1.bp.blogspot.com/-DDAQakjhtZ4/TnoN9yJYWQI/AAAAAAAAASY/sAB-K_T3sPE/s320/Image0169.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;परन्तु सौभाग्यवश आजादी के बाद पहली बार जनता के जागरूकता की वजह से इतना बड़ा जनआन्दोलन सार्थक रूप से सफल रहा । हम सौभाग्यशाली हैं कि हमें अन्‍ना जैसे व्यक्‍ति के अत्यंत प्रभावशाली नेतृत्व की वजह से एक नयी सुबह को देखने और भाग लेने का मौका मिला ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;120 करोड़ आबादी वाले देश में लोकपाल का अर्थ और प्रभाव न जानने के बावजूद भी जनता ने बढ़चढ़कर जो दिलचस्पी ली, वो सिर्फ यही संकेत देता है कि- अब हम जाग चुके हैं । हमी गांधी, भगत सिंह और सुभाष के सपूत हैं । अब यहां कोई जयचंद या धृतराष्ट्र नहीं राज कर सकता न ही उसकी मनमानी चलेगी ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इतनी जागरूकता और युवाओं के समर्थन और प्रदर्शन के बाद भी अगर कुछ राजनेता नजर अंदाज और संसद की गरिमा की बात करने वाले संसद में संसद की मर्यादा का हनन कर रहे हैं, उन्हें अवश्य ही यह सोच लेना चाहिए कि अब सारा देश जो अन्‍ना या गांधी अपने को मान लिया है वो उन्हें बख्शने वाली नहीं है । क्योंकिओ अन्‍ना और गांधी कोई व्यक्‍ति नहीं एक सोच है, जिससे पूरा भारत का जनसैलाब एक नये परिवर्तन की ओर अपने आप को अग्रसर देख रहा है-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #bf9000;"&gt;क्योंकि मैं वो अन्‍ना हूं, जो एक नये युग का निर्माण करने में एक नये भविष्य को जन्म देने वाला है ।&lt;/span&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;br /&gt;जय हिन्द&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुकेश पाण्डेय &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3617770739116937767-2842598221531050874?l=mukeshgkp.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/feeds/2842598221531050874/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2011/09/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/2842598221531050874'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/2842598221531050874'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2011/09/blog-post.html' title='अन्‍ना की हुंकार से लोकतंत्र हुआ मजबूत'/><author><name>mukesh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13668566544256037971</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image 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href="http://4.bp.blogspot.com/-MJWvnJBhoD0/TbK1X7GG9OI/AAAAAAAAAQ4/LHMDavKtmAU/s1600/ANNA_HAZARE_5791e_0.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="320" src="http://4.bp.blogspot.com/-MJWvnJBhoD0/TbK1X7GG9OI/AAAAAAAAAQ4/LHMDavKtmAU/s320/ANNA_HAZARE_5791e_0.jpg" width="303" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;कभी भी टूट सकता है, जनता के सब्र का बाँध । क्योंकि जनता अब काफी जागरूक हो चुकी हैं, क्योंकि आजादी के बाद अब तक की जितनी सरकारें हुईं उन्होंने देश का भला कम और अपना भला ज्यादा किया है ।&lt;br /&gt;आज जो सबसे बड़ा प्रश्न है, वो यह है, कि क्या हम&amp;nbsp; 1950&amp;nbsp; के बाद से पूर्णरूप से आजाद हुए हैं, या नहीं । अगर हैं, तो इतना वबंडर और सरकारों या राजनेताओं पर दोषारोपण क्यूं? और इन पर इतने इल्ज़ामात क्यूं? आखिरकार ये सरकार चलाने वाले तंत्र आखिर हम आपमें से ही तो हैं । इन्हें हमने ही तो ऐसा करने का मौका दिया है । तो फिर पछतावा क्यूं? परन्तु अगर हम, फ्लैशबैक में जायें और अंग्रेजी शासन व्यवस्था की तुलना अबतक की सरकारों से करें, तो कुछ मूल बिंदुओं पर हम इनमें शायद अंतर स्पष्ट न कर सकें । &lt;b&gt;वो मूल बिन्दु है, भ्रष्टाचार, कालेधन की कमाई, जनता का शोषण, नस्लभेद, क्षेत्रवाद, क्योंकि ये सारी की सारी समस्यायें तब भी थी और आज भी है । &lt;/b&gt;&lt;br /&gt;हाँ फर्क इतना है, कि तब का भारत न तो एक देश था, न ही एक गणराज्य बल्कि तब टुकड़ों में विभाजित था, और आपसी मतभेद, सत्तालौलुप शोषण आदि सामाजिक बुराईयों से भरा पड़ा था । जिसके परिणामस्वरूप बाहरी आक्रमणकारियों ने इसे अपनी कमाई का ज़रिया बनाकर और यहां के लोगों का शोषण किया है, परन्तु स्थिति आज भी वैसी ही है । बहुत कुछ नहीं बदला है, हाँ बदला है, तो लोगों का रहन-सहन सोचने की क्षमता ।&lt;br /&gt;जब देश गुलाम था तो अंग्रेजों के खिलाफ देश को एकजुट करने का बीड़ा जब गाँधी जैसे लोगों ने उठाया तो पूरा देश एक मंच पर आ गया जिससे अंग्रेजों जैसे बुद्धिमान और ताकतवर लोगों को भी हार मानना पड़ा । अगर मौजूदा स्थिति की बात करें तो आज भी देश कहने को तो आजाद है, परन्तु इसकी सत्ता जिन लोगों के हाथों में है, वो यह भूल गये हैं, कि उनका इस देश के प्रति क्या कर्तव्य होना चाहिये । अगर हम कुछ मुद्दों और शासन प्रणाली या सरकार के अधिकारों की बात करें तो लोकतंत्र एकमात्र जनता को गुमराह करने वाला शब्द है । और कुछ नहीं क्योंकि यहां की सरकार के पास जितने भी अधिकार हैं, वो उसको किसी भी प्रकार से उसको मनमानी करने से नहीं रोक सकता । और जनता लाचार ही लाचार तब तक बनी रहेगी, जब तक की अगली सरकार चुनने का मौका उसे न मिले । &lt;br /&gt;आज देश जागरूक हो रहा है, और जनता को भी एक मंच पर लाने वाले लोग मिलने लगे हैं, जिनके कार्यों से आप या हम किसी भी प्रकार का संदेह नहीं कर सकते ।&amp;nbsp; आज देश दो गुटों में बंट चुका है । एक है, सरकार पक्ष (या सत्तापक्ष चाहे वो किसी भी राजनीतिक दल से हो) दूसरा पक्ष समाजसेवी या सीधे शब्दों में कहें तो अन्‍ना हजारे जैसे लोग ।&lt;br /&gt;&lt;blockquote&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; मौजूदा सरकार कहने के लिए भ्रष्टाचार कालेधन और अन्य कई मुद्दों के खिलाफ मनमोहन सिंह जी के नेतृत्व में लड़ रहा है । वहीं दूसरी तरफ &lt;b&gt;अन्‍ना हजारे&lt;/b&gt; जैसे लोगों के सामने आने से जनता को एक नई रोशनी भी मिल गयी है । अब जंग की शुरूआत भी एक मुद्दे से दोनों गुटों के बीच शुरू हो गई जो है- &lt;b&gt;लोकपाल विधेयक &lt;/b&gt;।&lt;/blockquote&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-XY5gwS2xJ-4/TbK2mSdv-eI/AAAAAAAAAQ8/yV5RhqMthfg/s1600/lokpal+1.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="160" src="http://1.bp.blogspot.com/-XY5gwS2xJ-4/TbK2mSdv-eI/AAAAAAAAAQ8/yV5RhqMthfg/s320/lokpal+1.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;अगर हम इसे ‘देश आजाद जनता गुलाम’ के दृष्टिकोण से सोचें तो यह लोकपाल विधेयक एकमात्र बहाना है, जिसमें जनता के घेरे में सरकार है । बात न तो एक कमेटी के निर्माण एवं अधिकार तक ही सीमित है, बल्कि आम जनता इसको अपने मूलभूत अधिकारों से जोड़ रही है । और मैं कहता हूं, क्यूं नहीं जोड़े क्योंकि यह तो एकमात्र सरकारों की मनमानी के खिलाफ शुरूआत है । आज पहली बार आजादी के बाद ऐसा देखने व सुनने को मिला होगा, जिसमें जनता ने सारी राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ जन‍आंदोलन किया हो । सरकार की बात करें तो मनमोहन सिंह जी देश के प्रति वफादार कम और पार्टी के प्रति ज्यादा ही वफादार हैं और हों भी क्यूं नहीं, क्योंकि इनकी भी पृष्ठभूमि पार्टी के वफादारी से ही तो है ।&lt;br /&gt;जब अन्‍ना हजारे जैसे लोग गाँधी जी के मार्ग का अनुसरण करते हुए जिस प्रकार सरकार को अपने आगे झुका दिया हो या बेबश कर दिया हो तो इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है । जहां पर देश में विभिन्‍न भागों में रोज-रोज न जाने कितने आंदोलन हो रहे हैं, परन्तु जो तरीका अन्‍ना हजारे जी का है, वो काफी सराहनीय है क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो बच्चे से लेकर बूढ़े तक मजदूर से लेकर फिल्म स्टार तक, नौकर से लेकर अफसर तक इनके मंच पर नहीं आते । एक बार फिर अन्‍ना हजारे जी के इस आंदोलन ने यहां के लोगों को एकजुट होकर अपने हक की लड़ाई लड़ने का तरीका जो सिखला दिया है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;blockquote&gt;और एक बार फिर से देश के लोग एकजुट होकर अपनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हो चुके हैं । लोकपाल विधेयक तो एकमात्र बहाना था, जिसमें जनता के समक्ष सरकार को झुकना पड़ा- &lt;i&gt;‘क्योंकि अभी तो ये अंगड़ाई है, आगे बहुत लड़ाई है &lt;/i&gt;।’ और मैं सिर्फ इतना कहना चाहूँगा कि अब जनता आजाद होना चाहती है । और इसे रोकना आसान नहीं होगा - क्योंकि पूरे आवाम की एक ही आवाज है । &lt;/blockquote&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;i&gt;दररे-दररे से निकला बस यही आवाज है,&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; आगे अन्‍ना तुम चलो, हम तुम्हारे साथ हैं ।&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;/i&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; जय हिन्द......&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3617770739116937767-6732359203595686906?l=mukeshgkp.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/feeds/6732359203595686906/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2011/04/blog-post.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/6732359203595686906'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/6732359203595686906'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2011/04/blog-post.html' title='देश आजाद जनता गुलाम'/><author><name>mukesh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13668566544256037971</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/-wI9zXReltOU/TbKZvak746I/AAAAAAAAAQQ/yyW68uqMV8E/s220/asd.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-MJWvnJBhoD0/TbK1X7GG9OI/AAAAAAAAAQ4/LHMDavKtmAU/s72-c/ANNA_HAZARE_5791e_0.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3617770739116937767.post-6770184930437764488</id><published>2010-09-22T22:00:00.000-07:00</published><updated>2010-10-14T04:01:32.387-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='किसका वजूद कितना पक्‍का राममंदिर या बाबरी मस्जिद का?'/><title type='text'>किसका वजूद कितना पक्‍का राममंदिर या बाबरी मस्जिद का?</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/TJreqw56_yI/AAAAAAAAAOM/GfoLS5sYJBg/s1600/sriram2.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" px="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/TJreqw56_yI/AAAAAAAAAOM/GfoLS5sYJBg/s320/sriram2.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;एक बार फिर से हमारा देश भारत&amp;nbsp; इतने विकास और उत्थान के बावजूद भी भावनात्मक विवादों की लड़ाइयों के आगे अपने आप को उबार नहीं सकेगा ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;क्योंकि यह एक ऐसा मुद्दा है, जिसमें कुछ भी टिप्पणी करना आसान नहीं होगा । हम आज जिस फैसले का इंतजार कर रहे हैं, वो वास्तव में क्या दोनों के वजूद को साबित करने के लिए पुख्ता है? अगर नहीं तो ऐसे मामले न्यायालयों में या संगठनों के सहयोग या सलाह से नहीं सुलझाए जा सकते?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सबसे बड़ा सवाल इस मुद्दे का यह है कि अयोध्या का नाम अगर आज भी अयोध्या है, तो वह एक इत्तफ़ाक नहीं हो सकता । अगर वास्तव में बाबर ने वहां मंदिर न तोड़कर वहां मस्जिद का नये रूप से निर्माण करवाया तो उस पर विवाद कैसा? अगर उस मस्जिद पर विवाद है? तो और मस्जिदों और मंदिरों पर क्यूं नहीं?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज सब लोग जो चाहें हिन्दू सम्प्रदाय से जुड़े हों या मुस्लिम समुदाय से, इन सब चीजों को मुद्दा बनाना महज एक समुदाय का दूसरे समुदाय के प्रति घृणा पैदा करना है, न कि किसी का हित सोचना क्योंकि न तो हिन्दू समुदाय के हितकारी उसे मंदिर ही बनने देना चाहते न ही मुस्लिम समुदाय के वादी प्रतिवादी उसे मस्जिद ही रहने देना चाहते हैं । सबसे बड़ा प्रश्न यह भी है, कि हम आज भी इतिहास को कुरेदने की कोशिशों में लगे हुए हैं, जिससे भारतीय हमेशा आहत हुए हैं । &lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/TJrewbb4icI/AAAAAAAAAOU/cHXGnN-zTko/s1600/images1.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" px="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/TJrewbb4icI/AAAAAAAAAOU/cHXGnN-zTko/s320/images1.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;हमारे ही कुछ लोग इस मुद्दे को हिन्दू और मुसलमानों के वजूद की लड़ाई से भी जोड़ने का प्रयास करते हैं, क्योंकि ये वो भली-भाँति जानते हैं, कि अगर हम इसे संप्रदाय से जोड़ते हैं तो हमारा लाभ अवश्य निकल आयेगा । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बात वजूद की निकली है, तो किसका वजूद कितना पक्‍का है आप स्वयं इसका आंकलन कर सकते हैं? क्योंकि भारत जब मुगलों के द्वारा आहत हुआ तो न जाने कितने मंदिर टूटे होंगे, कितनी मस्जिदें बनी होंगी, पर उनमें से केवल अयोध्या में ही किसी मस्जिद का नाम बाबरी मस्जिद क्यूं है? अगर भारत का इतिहास और इतिहासकार इस बात की पुष्टि करते हैं, कि पहले मुगल भारत पर आक्रमण करने आये । और न जाने कितनी बार यहां के लोगों पर अत्याचार किया और इसे बार-बार लूटा । उन सारे मुगलों का एक ही मकसद था लूटना और यहां से धन चुराकर अपने प्रदेश वापस चले जाना । परन्तु इतिहास के पन्‍नों में बाबर एक ऐसा हमलावरी था जिसने अपना साम्राज्य यहां स्थापित किया । जिससे एक बात तो स्पष्ट हो ही चुकी कि वजूद पुराना बाबर का है, या भारत का? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उस भारत का जहां की सभ्यता दुनिया के अन्य देशों से काफी विकसित थी । उस भारत का जहां न कोई सम्प्रदाय हुआ करता था, न ही आपसी कोई टकराव । मुगलों से पहले का भारत और मुगलों के बाद का भारत काफी बदल चुका था । क्योंकि उससे पहले न कोई धर्म परिवर्तन ही हुआ था ना ही मस्जिदें तोड़कर मंदिर ही बने थे । हां ऐसा अवश्य होता था कि राम और रहीम सबके दिलों में होते थे न कोई राम और रहीम को अलग समझा, न ही रहीम या राम के नाम पर ईर्ष्या की । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;हम सब जानते हैं, पूरी दुनिया जानती है, कि अयोध्या राम की जन्म भूमि थी, और है । परन्तु इस तथ्य का न ही कोई सबूत है, न ही दिया जा सकता है? इस बात से मुस्लिम समुदाय जो इस मुद्दे में प्रतिवादी और वादी के रूप मे न्यायालयों में गुहार लगा रहे हैं, वह भी इस बात से इनकर नहीं करते कि अयोध्या ही राम की जन्मभूमि है, और आज की तारीख में अयोध्या ही दुनिया का एक मात्र ऐसा नगर है, जहां हर घर में राम-जानकी का मंदिर है ।&lt;/b&gt; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तो एक बात और स्पष्ट हो ही जाती है कि अयोध्या में मंदिर था या नहीं? हाँ विवाद यह है, जिसमें हिन्दू समुदाय बाबरी मस्जिद को ही राम मंदिर मानते हैं और उनके अनुसार प्राचीन राम मंदिर को तोड़कर बाबर ने बाबरी मस्जिद का प्रारूप दिया था, जबकि मुस्लिम समुदाय इस बात को मानने से बिल्कुल इन्कार करते हैं । तथा वो इस मस्जिद के बारे में यह बताते हैं, कि बाबरी मस्जिद का निर्माण बाबर ने नये रूप से खाली जगह में कराया था । जहां पर कोई भी मंदिर नहीं था । ना ही कोई मंदिर तोड़कर उसे मस्जिद बनाया गया । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/TJre5QX0E2I/AAAAAAAAAOc/vf3oM8ynnvs/s1600/babri.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" px="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/TJre5QX0E2I/AAAAAAAAAOc/vf3oM8ynnvs/s320/babri.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;अगर विवाद के इतिहास पर नजर डालें तो इसको&amp;nbsp;61 साल लगभग हो चुके हैं । विवाद की शुरूआत 22-23 दिसम्बर&amp;nbsp;1949 से हुई थी, जिसके तहत मस्जिद के अंदर चोरी छिपे मूर्तियां रखने से कथित तौर पर हुआ । और अब यह मुद्दा काफी तूल पकड़ चुका है, जिसका निर्णय उच्च न्यायालय के हाथ में है । अगर देखा जाय तो दर्जनों वाद बिंदुओं पर फैसला आना है, लेकिन मुख्य मुद्दा ये है, कि वहां पहले राम मंदिर था या बाबर ने मस्जिद रिक्‍त जगह में बनवायी थी । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;&lt;u&gt;&lt;span style="color: black;"&gt;बाबरी मस्जिद और विवादित घटना क्रम ः&lt;/span&gt;&lt;/u&gt;&lt;/b&gt; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;1&amp;nbsp;* मस्जिद के अन्दर मूर्तियां रखने का मुकदमा पुलिस ने अपनी तरफ से करवाया जिसकी वजह से&amp;nbsp;29 दिसम्बर&amp;nbsp;1949 में मस्जिद के कुर्की के बाद ताला लगा दिया गया और तत्कालीन नगरपालिका अध्यक्ष प्रिय दत्त राम के देख-रेख में मूर्तियों की पूजा की जिम्मेदारी दे दी गयी । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;2&amp;nbsp;* 16जनवरी&amp;nbsp;1950 में हिंदू महासभा के कार्यकारी गोपाल सिंह विशारद ने मूर्तियों की पूजा के लिए सिविल कोर्ट में अर्जी दायर की जिसके फलस्वरूप सिविल कोर्ट ने पूजा आदि के लिए रिसीवर व्यवस्था बहाल रखी । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;3&amp;nbsp;*&amp;nbsp;1949 में निर्मोही अखाड़ा ने अदालत में तीसरा मुकदमा दर्ज किया जिसमें कोर्ट से यह अपील थी कि उस स्थान पर हमेशा से राम जन्म स्थान मंदिर था, और वह निर्मोही अखाड़ा की संपत्ति है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;4&amp;nbsp;*&amp;nbsp;1961 में सुन्‍नी वर्क्फ़&amp;nbsp; बोर्ड और कुछ स्थानीय मुसलमानों ने चौथा मुकदमा दायर किया जिसमें यह जिक्र था कि बाबर ने&amp;nbsp;1528 में यह मस्जिद बनवायी जो 1949, 22/23 दिसम्बर तक यहां नमाज अदा किया गया है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;5&amp;nbsp;* मुस्लिम पक्ष का तर्क यह था कि निर्मोही अखाड़ा ने&amp;nbsp;1887 के अपने मुकदमे में केवल राम चबूतरे का दावा किया था न कि मस्जिद पर जिससे मुस्लिम पक्ष राम चबूतरे पर हिंदुओं के कब्जे और दावे को स्वीकार करता है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;6&amp;nbsp;* और मुस्लिम पक्ष यह भी मानता है कि अयोध्या राम की जन्मभूमि भी है । परन्तु बाबरी मस्जिद खाली जगह पर बनायी गयी थी न की तोड़कर ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;7 * लगभग&amp;nbsp;40 सालों तक यह विवाद लखनऊ तक ही था, परन्तु&amp;nbsp;1984 में विश्‍व हिन्दू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहयोग से राम जन्मभूमि मुक्‍ति यज्ञ समिति ने इसे राष्ट्रीय मंच पर एक अभियान की तरह ला खड़ा किया । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;8&amp;nbsp;*&amp;nbsp;1986 में स्थानीय वकील उमेश चन्द्र पाण्डेय की दरख्वास्त पर जिला जज फैजाबाद के.एम. पाण्डेय ने विवादित परिसर खोलने को एकतरफा आदेश दे दिया, जिसकी तीखी प्रतिक्रिया मुस्लिम समुदाय के तरफ से हुई । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;9&amp;nbsp;* फरवरी&amp;nbsp;1986 में बावरी मस्जिद संघर्ष समिति का गठन हुआ और मुस्लिम समुदाय ने संघर्ष शुरू कर दिया । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;10&amp;nbsp;*&amp;nbsp;1989 में राजीव गाँधी ने चुनावी रैली को संबोधित किया जिसमें उन्होंने वहां की जनता को फिर से रामराज्य के सपने दिखाये । उसी समय विश्‍व हिन्दू परिषद ने वहां मंदिर का शिलान्यास भी कराया । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;11&amp;nbsp;*&amp;nbsp;90 के दशक में यह मुद्दा राजनीतिक मोड़ ले चुका था जिसमें राजीव गाँधी ने तथा अन्य पार्टियां जैसे भारतीय जनता पार्टी ने भी इसे राजनीतिक हवा देने की कोशिश की । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;12&amp;nbsp;*&amp;nbsp;1990 में कुछ राम भक्‍तों ने मस्जिद पर धावा भी बोला जिससे मस्जिद कुछ आहत भी हुआ । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;13 *&amp;nbsp;6 दिसंबर&amp;nbsp;1992 में देशव्यापी हिंन्दुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा मस्जिद के गुबंद को ध्वस्त कर दिया, जिसके फलस्वरूप जगह-जगह पर दंगे हुए, जिसमें काफी लोग मारे भी गये । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;14&amp;nbsp;*&amp;nbsp;2002 में एक बार फिर से देशव्यापी कार सेवकों ने अयोध्या चलो आंदोलन के तहत भाग लिया । परन्तु साधन व्यवस्था और सरकार के प्रयास से अयोध्या में कोई विवाद नहीं हुआ लेकिन गुजरात की तरफ लौटने वाले कार सेवकों को मुस्लिम समुदाय के हमले का शिकार होना पड़ा । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इन सारी घटनाओं से यही निष्कर्ष निकलता है, कि यह मुद्दा न तो ६१ साल पुराना है, न ही किसी समुदाय के पक्ष का न ही विपक्ष का और ना ही किसी का वजूद ही पक्‍का होना है । हां एक बात तो अवश्य तय है, कि निर्णय किसी के भी पक्ष में क्यों न जाये, इसे न तो वहां मस्जिद बनना है, न ही मंदिर । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;क्योंकि अगर फैसला मस्जिद के पक्ष में जाता है, तो हिन्दू समुदाय उस फैसले को स्वीकार नहीं करेगा, और अगर फैसला हिंदू समुदाय के पक्ष में जाता है, तो मुस्लिम समुदाय उसे नहीं स्वीकार करेगा । क्योंकि ये ऐसे मुद्दे हैं जिसका फैसला वहां के लोग करेंगे, इस देश की जनता करेगी, और जनता सिर्फ शांति चाहती है । न तो वह दंगा चाहती है, न ही एक समुदाय का दूसरे समुदाय से घृणा ही जानती है । और हम तो उस देश के रहने वाले हैं, जहां पर हमारे लिए प्रेम ही सबकुछ है? हम उस मंदिर और मस्जिद के लिए क्यों लड़ें, जो हमारे अपनों के ही कब्र के ऊपर बनी हो? हम ऐसे उस राम और रहीम को उन मंदिर मस्जिदों से मुक्‍त कर देना चाहते हैं, जो कि विवादित ढांचों में बसते हैं । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;i&gt;&lt;b&gt;हम उस राम, रहीम को अपने हर भाईयों के हृदय में देखना चाहते हैं, जहां एक ही हृदय में मंहिर भी हो, मस्जिद भी, गिरजा घर और गुरूद्वारा भी-&lt;/b&gt;&lt;/i&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;क्योंकि मंदिर और मस्जिद का वजूद हमारे और आपसे है । हम रहेंगे तो मंदिर में भी नमाज अदा कर लेंगे, हम रहेंगे तो मस्जिद में भी दीप जला लेंगे और हमारे राम रहीम भी तो यही कहते हैं-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;“मोको कहाँ ढूंढ़े है बंदे, मैं तो&amp;nbsp; तेरे&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;b&gt; पास में.........”&lt;/b&gt; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&lt;span style="color: #cc0000;"&gt;- मुकेश पाण्डेय &lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3617770739116937767-6770184930437764488?l=mukeshgkp.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/feeds/6770184930437764488/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2010/09/blog-post.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/6770184930437764488'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/6770184930437764488'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2010/09/blog-post.html' title='किसका वजूद कितना पक्‍का राममंदिर या बाबरी मस्जिद का?'/><author><name>mukesh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13668566544256037971</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/-wI9zXReltOU/TbKZvak746I/AAAAAAAAAQQ/yyW68uqMV8E/s220/asd.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/TJreqw56_yI/AAAAAAAAAOM/GfoLS5sYJBg/s72-c/sriram2.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3617770739116937767.post-6733232131243929158</id><published>2010-08-23T02:20:00.000-07:00</published><updated>2010-08-23T03:25:57.802-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='यह जो देश है मेरा'/><title type='text'>यह जो देश है मेरा</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/THI92sZtuqI/AAAAAAAAAN0/waZkkzpUFPw/s1600/C1200101_1740.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://4.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/THI92sZtuqI/AAAAAAAAAN0/waZkkzpUFPw/s320/C1200101_1740.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;हमारा देश, आपका देश, हर उस नागरिक का देश जो, उसे एक पहचान देता है, उसे एक प्रेरणा देता है, जिसकी वजह से उसे पूरी दुनिया में पहचाना जाता है । विश्‍व में न जाने कितने देश होंगे, जिसके बारे में सबके पास शायद जानकारी न हो, परन्तु बहुत से महापुरूष दुनिया में ऐसे हुए जिनकी वजह से उस देश के बारे में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी हो ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज हम 64 वाँ स्वतंत्रता दिवस बहुत ही हर्षौल्लास एवं उत्साह के साथ मना रहे हैं, जिसकी गरिमा, जिसकी प्रतिभा और उसके प्रेम और सौहार्द्र की वजह से पूरी दुनिया नतमस्तक हुई है । चाहे वह कोई क्षेत्र क्यूं न हो।&lt;br /&gt;यह जो मेरा देश भारत जिसका इतिहास काफी पुराना है, जिसको बड़े से बडे दर्शनशास्त्रियों ने अलग-अलग नाम से परिभाषित किया है, यह हमारे लिए तथा पूरे भारतवासियों के लिए बड़े ही फक्र की बात है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हमारा देश भारत जहां इतनी विविधतायें होने के बावजूद भी एकता, प्रेम व शांति का प्रतीक बना हुआ है, यह बहुत ही असाधारण बात है । इतने बाहरी आघातों के बावजूद भी अपने को कभी विचलित नहीं होने दिया है । इसके लिए हम सबको शुक्रगुजार होना चाहिए उन लोगों का, जिन्होंने विषम परिस्थितियों में भी, इस देश के लिए, हमारे-आपके लिए, आने वाली नस्लों के लिए सबकुछ अर्पित कर दिया । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज हम आजाद उस पंक्षी की तरह हैं, जिसका बसेरा पूरे विश्‍व, यूँ कहें तो पूरे भूखण्ड के हर कोने में है, कोई ऐसा देश नहीं होगा, जहां अपने देश की महक और संस्कृति की खुशबू न मिले। जरूरत है इस खुशबू को बनाये रखने की , और जो प्रेम व शांति का संदेश हमारे पूर्वजों ने दुनिया को पढ़ाया है, उसे याद दिलाते रहने की । यह अलग बात है कि बहुत से पड़ोसी हमारी इस अखण्डता और हृदय विशालता से जलते रहते हैं, तो इसका मतलब यह तो नहीं की हम भी इंसानियत का दामन छोड़ दें ।&amp;nbsp; हम कैसे भूल जायें की जो शांति का संदेश, बुद्ध व बापू ने दुनिया को पढ़ाया, जिस हृदय-विशालता और धर्म समन्वय से पूरी दुनिया को एक परिवार मानने का संकल्प हमने लिया है, उसे आसानी से कैसे भूल जायें -&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;b&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; "अगर नफरत करने वाले नफरत का दामन नहीं छोड़ते तो हम प्यार करने वाले मोहब्बत और प्रेम का दामन क्यों छोड़ दें "!&lt;/b&gt;&lt;span id="goog_1214042671"&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="goog_1214042672"&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="goog_1214042677"&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="goog_1214042678"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;क्योंकि हमने हमेशा दूसरों को अतिथि के रूप में देखा है, और हमारी संस्कृति के अनुसार हर अतिथि भगवान की तरह माना गया है, यह अलग बात है कि उन अतिथियों की नीयत शैतानों की तरह रही। हमारे देश पर न जाने कितने हमले हुए न जाने कितनी बार इसकी संस्कृति को बर्बाद करने की कोशिश की गयी । कभी मुगलों ने तो कभी अंग्रेजों ने हमारे ऊपर बहुत अत्याचार किये, परन्तु हमने सबको गले लगाया, और आज भी लगाते हैं, और हमेशा लगाते रहेंगे ।&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/THI99SOd02I/AAAAAAAAAN8/hNzPSdQ3QJY/s1600/indian_flag_400.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://3.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/THI99SOd02I/AAAAAAAAAN8/hNzPSdQ3QJY/s320/indian_flag_400.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;b&gt;जिन मुगलों ने इस देश को बर्बाद करने की कसम ली, जिन्होंने इसे कभी सोमनाथ के रूप में लूटा तो कभी, हमारी धर्म और संस्कृति का बालात्कार किया । परन्तु हमने उन्हें, प्रेम व शांति से अपने बड़प्पन का एहसास कराया, अगर ऐसा नहीं होता तो अकबर हमारे इतिहास के पन्‍नों में स्वर्ण अक्षरों से महान नहीं कहलाता । &lt;/b&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हमने हमेशा दुनिया को बिना भेदभाव के अपना परिवार मानकर फूल ही प्रस्तुत किया है, और वे हमें बार-बार जख्म देने की कोशिश में लगे रहते हैं, परन्तु आज की स्थिति यह है कि पूरी दुनिया ने हमारा लोहा माना है, और मानते रहेंगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;क्योंकि आज दुनिया के महान वैज्ञानिक और विकसित देश जिन सपनों को साकार करने में प्रयासरत हैं, वे कहीं न कहीं हमारी असाधारण उपलब्धियों का ही परिणाम है । आप किसी भी क्षेत्र में देख सकते हैं, बात शुरू करते हैं राजनीति से, तो दुनिया को राजनीति करने की तरीके और सहजता से लोगों के हृदय में जगह बनाने का श्रेय हमारे ही नेताओं को जाता है । क्योंकि दुनिया के लिए लड़ने वाला कोई नेता हुआ तो वो गाँधी और सुभाष हुए जिन्होंने अपने लोगों के अलावा दूसरे देशों में अपनी असाधारण प्रतिभा से लोगों के हृदय में जगह बनायी ।&lt;br /&gt;आज भी दुनिया विवेकानन्द जी को एक अनूठे रहस्य की तरह ही जानती है, जिन्होंने बहुत ही कम समय में पूरे संसार को नैतिकता और उनके कर्तव्यों का पाठ पढ़ा गये । आज भी डॉ. भामा अमेरिका जैसे देशों के लिए रहस्य ही है । खेल की बात करें तो ध्यानचंद से लेकर सचिन तेंदुलकर के आसपास दुनिया का कोई भी खिलाड़ी अपने-आप को बौना ही पाता है । शिक्षा की बात करें तो दुनिया यहां की शिक्षा, और यहां के इंजीनियरों और डॉक्टरों से लेकर अर्थशास्त्रियों के लिए अपना आँचल बिछाये रहते हैं । ये सब हमारे लिए बड़े ही फक्र की बात है,और क्यूं न हो । क्योंकि ये सब हमने बड़े ही बलिदान और त्याग के बाद पाया है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हमारे बहुत से अपने, जो देश के बाहर रह रहे हैं और जो आज अपने कार्यों के वजह से, व्यवसाय के वजह से या शिक्षा एवं रोजगार की वजह से भले ही बाहर हैं, लेकिन वे हमेशा ही अपने देश , अपने लोगों के लिए कुछ कर गुजरने की चाहत ही नहीं बल्कि कुछ कर गुजरते हैं । जिससे हम सभी&amp;nbsp; को तथा इस देश को बड़ा ही नाज होता है, चाहे वो सुनीता विलियम्स, कल्पना चावला हों या उद्योगपति, लक्ष्मीनिवास मित्तल जी क्यों न हों ।&lt;br /&gt;ये कोई भी प्रगति का कार्य करते हैं, तो हम यह महसूस करते हैं, कि हमारा तिरंगा आज ब्रिटेन में लहरा रहा है, आज ब्रिटेन जिसने भारत पर लगभग 200 सालों से अधिक दिनो तक राज किया, वहां पर हमारा मित्तल अकेले ही हजार सालों तक राज कर सकता है, इसे हम ब्रेन-ड्रेन न कहकर ब्रेन-गेन अवश्य कह सकते हैं । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मैं उम्मीद करता हूँ, कि यहां का हर वो नागरिक अपने-आप पर यह गर्व अवश्य करता होगा कि उसके दिल में अपने इस वतन के लिए मर-मिटने की और कुछ नया कर गुजरने का उत्साह जरूर&amp;nbsp; आता होगा । और हो भी क्यों नहीं क्योंकि उसके रबों में भी तो यही खून दौड़ता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज की तरीख में भी यहां का हर सिपाही, हर जवान, अपने आप को अपने परिवार, अपने लोगों के बजाय देश के लिए शहीद होने पर फक्र करता है । तभी तो पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश जैसे बुरी नजर वाले देशों को इधर आँख घुमाने पर भी सहमना पड़ता है। हमने आजादी के बाद कई छोटी बड़ी लड़ाइयाँ अवश्य देखी हैं, जिसमें हमारे अनेक वीर सपूत अपने देश की रक्षा, सरहदों को बरकरार रखने के लिए हँसते-हँसते शहीद हो गये, अगर उन शहीदों की माताओं से पूछा जाय, उनकी विधवाओं से पूछा जाय की आप का बेटा शहीद हो गया, इस पर आपका क्या कहना है, आपके पति शहीद हो गये आप पर क्या असर पड़ेगा? तो हर माँ का एक ही जवाब होता है, कि अगर मेरे और बेटे होते तो वे भी इस देश के लिए कुर्बान हो जाते।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;इससे आप अनुमान लगा सकते हैं, कि हम अन्दर से भी उतने ही मजबूत हैं, जितने की बाहर से ।उस देश का विकास क्यों नहीं होगा? उस देश का पताका क्यों नहीं लहरायेगा, जहां पर हर व्यक्‍ति अपने-आप को देश पर मर मिटने के लिए हमेशा तैयार रखता है ।&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;आप सोचेंगे कि आज की तारीख में हमारे देश में इतना भ्रष्टाचार है, इतनी लाचारी, बीमारी है, जो कभी ठीक से खड़ा नहीं हो सकता था, वो क्या किसी का नेतृत्व करेगा? वो क्या किसी को सहारा देगा? &lt;br /&gt;तो आपका यह सोचना और ऐसा आंकलन करना बिल्कुल गलत और अप्रमाणित है, क्योंकि अगर ऐसा होता तो दुनिया में बड़े-बड़े अनुसंधान नहीं होते, दुनिया के शक्‍तिशाली देश अपना भविष्य, अपना कारोबार, यहां के सहयोग के बिना निर्धारित नहीं कर पाते । आज फ्रांस, जर्मनी इजराइल, अमेरिका, रसिया जैसे देश अपनी दिलचस्पी हममें नहीं रखते ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;अंत में एक बार फिर से पूरे देशवासियों, भारतवासियों, हिन्दुस्तानियों से यह आग्रह व उम्मीद करता हूँ, कि वे हमारे इस देश को एक ऐसा उपहार दें, जिससे पूरी दुनिया नतमस्तक हो जाये । &lt;/b&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; जय हिन्द&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3617770739116937767-6733232131243929158?l=mukeshgkp.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/feeds/6733232131243929158/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2010/08/blog-post.html#comment-form' title='8 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/6733232131243929158'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/6733232131243929158'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2010/08/blog-post.html' title='यह जो देश है मेरा'/><author><name>mukesh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13668566544256037971</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/-wI9zXReltOU/TbKZvak746I/AAAAAAAAAQQ/yyW68uqMV8E/s220/asd.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/THI92sZtuqI/AAAAAAAAAN0/waZkkzpUFPw/s72-c/C1200101_1740.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>8</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3617770739116937767.post-3358217441417556854</id><published>2010-07-27T03:06:00.000-07:00</published><updated>2010-08-16T05:51:46.034-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='तो दूर तलक जायेगी'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='बात निकली है'/><title type='text'>**बात निकली है, तो दूर तलक जायेगी***</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/TGkwu86RzzI/AAAAAAAAANM/SjKRQ8PQ71E/s1600/kash.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://4.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/TGkwu86RzzI/AAAAAAAAANM/SjKRQ8PQ71E/s320/kash.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;b&gt; कश्मीर घाटी में बदलती स्थिति और तनाव सरकार की दोहरी नीति की ओर इशारा कर रही है, जहाँ सरकार अर्द्धसैनिक बलों को हटाकर सेना द्वारा फ्लैग-मार्च करा कर वहां की जनता के बीच आक्रोश बढ़ा रही है । वहीं सरकार के घटक दल के रूप में उमर अब्दुला अलग ही राग अलाप रहे हैं । जिससे सरकार की दोहरी नीति साफ झलक रही है । &lt;/b&gt;&lt;br /&gt;आज की तारीख में कश्मीर समस्या देश के सामने तथा मौजूदा सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि आतंकवाद की जड़ वहीं से शुरू होती है । आज सरकार जो आतंकवाद से लड़ने का दावा कर रही है, तथा बार-बार पाकिस्तान से वार्ता के लिए इच्छा व्यक्‍त कर रही है, वो स्वयं अपने घटक दलों पर लगाम कसने में असमर्थ है । जो स्थिति पाकिस्तान में है, जैसा कि आप जानते हैं, वहां की सरकार कठपुतली बनी है, वही स्थिति कश्मीर में भारत के साथ है, क्योंकि वहां पर सरकार न तो हुर्रियत नेताओं पर और ना ही स्वयं वहां की राज्य सरकार पर नियंत्रण कर पा रही है, वहां की राज्य सरकार जो आतंकवाद से लड़ने का दावा तथा आतंकवादी घटनाओं की जिम्मेदारी पाकिस्तान द्वारा घुसपैठ बताती है, तो कभी उन्हें, सैनिकों द्वारा मारे जाने पर शहीद , जिससे यह तो स्पष्ट है, कि सरकार की दोहरी नीति, जिसे आम जनता नहीं समझ सकती है । &lt;br /&gt;वहां कुछ दिनों पहले स्थिति यह थी कि वहां सैनिकों को डेडा तथा प्रदर्शनकारियों को पत्थर पकड़ा कर सरकार एक अलग ही, मैच कराने के फिराक में है, जिसकी वजह से जितनी त्रस्त वहां की जनता है, उससे अधिक सैनिक लाचार नजर आते हैं । अपने साथी का सर फटने पर इलाज कराने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं है । &lt;br /&gt;वहां के हालात ऐसे हैं, कि जनता किधर जाये, सरकार के साथ या वहां के हुर्रियत नेताओं के साथ जो इसे अलग दर्जे की माँग में लगे हुए हैं, जो मंचों से शाँति की माँग तो करते हैं मगर वहां के लोगों को सरकार के खिलाफ भड़काने एवं उन्हें गुमराह करने में भूमिका निभा रहे हैं । ऐसी स्थिति में वहां की जनता काफी परेशान एवं लाचार सी हो चुकी है, वो न चाहते हुए भी अपने लोगों पर पत्थर बरसाने पर मजबूर है । उनकी स्थिति “एक तरफ कुआँ एक तरफ खाई” की बनी हुई है ।&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/TGkw1SqxjuI/AAAAAAAAANU/AYUqMjrF8MQ/s1600/crpf.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://2.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/TGkw1SqxjuI/AAAAAAAAANU/AYUqMjrF8MQ/s320/crpf.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;मौजूदा स्थिति की वजह कश्मीर को अलग दर्जे की मान्यता भी हो सकती है, क्योंकि कश्मीर अन्य राज्यों से अलग इसलिए है, कि वहां दूसरे राज्यों के लोगों को बसने की आजादी नहीं है, जैसा की बाकी अन्य राज्यों में, धरती जन्नत कहा जाने वाला कश्मीर आज पर्यटन स्थल तो दूर रोजगार के लिए भी सहज नहीं है, जिससे वहां की जनता दूसरे राज्यों की जनता से मुखातिब हो सके, तथा अपने विचारों का आदान प्रदान कर सके । अगर ऐसा संभव हो सके तो, स्थिति अपने आप धीरे-धीरे सही हो सकती है । &lt;br /&gt;&lt;b&gt;अगर सरकार वास्तव में कश्मीर की तरफ से चिंतित है, तो वह सबसे पहले वहां के लोगों के बीच जाय और वहां की समस्याओं से वाकिफ हो, न कि हुर्रियत मीटिंग करे-&amp;nbsp; अगर सरकार अन्य राज्यों में संवेदनशील संगठनों पर बैन लगा सकती है, तो वहां क्यों नहीं, अगर हम असम, पंजाब एवं अन्य राज्यों से आतंकवाद खत्म कर सकते हैं, तो वहां क्यूँ नहीं-?&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;शायद सरकार अपना राजनीतिक समीकरण सही करने के लिए, वहां के हुर्रियत को खुश रखना चाहती है, जिससे उसे अन्य राज्यों में वहां के लोगों से सहानुभूति रखने वाले लोगों का वोट बैंक बढ़ सके । &lt;br /&gt;ऐसा नहीं कि इससे पहले किसी सरकार ने पहल न की हो, या किसी सत्तादल की सरकार या विपक्षी दल की पहले की सरकारों ने इस क्षेत्र में प्रयास न किया हो,- हाँ ऐसा अवश्य हो सकता है, कि उनके प्रयास सही एवं निष्पक्ष भले न हों-&lt;br /&gt;क्योंकि सबसे पहले इसकी पहल स्व. लालबहादुर शास्त्री जी के द्वारा की गयी- परिणाम क्या हुआ - हमें तथा इस देश को, मिट्टी के लाल कहे जाने वाले जनप्रिय नेता को गवाँना पड़ा । ताशकंद समझौता आज भी पूरे देशवासियों के लिए अबूझ पहेली ही है, क्योंकि पहली बार ११ जनवरी १९६६ को भारत और पाकिस्तान के बीच मशहूर समझौते पर दस्तखत करने के बाद शास्त्री जी का देहांत हो गया । जिस पर उनकी पत्‍नी ललिता जी ने आरोप लगाया था कि उन्हें जहर दे दिया गया है । अभी भी उनके पुत्र सुनील शास्त्री उस हादसे से उबर नहीं पाये हैं । &lt;br /&gt;दूसरा समझौता जो कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला में सम्पन्‍न हुआ, जिसमें भारत की तरफ से इंदिरा गाँधी तथा पाकिस्तान के तरफ से जुल्फिकार अली भुट्टो शामिल थे । इस समझौते की जो सबसे खास बात रही वो कि दोनों देशों ने इस बड़े मुद्दे को बिना किसी अन्य देश की मध्यस्थता के ही पूरा कर लिया ।&amp;nbsp; शिमला समझौता भारतीय दृष्टिकोण से भारत का पाकिस्तान को समर्पण था, क्योंकि भारत की सेनाओं ने पाकिस्तान के जिन प्रदेशों पर अधिकार स्थापित किया था, उसे सहज ही छोड़ना पड़ा । इससे भारत को मात्र एक ही लाभ हुआ, जिससे भारतीय छवि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ बरकरार रहे । &lt;br /&gt;आज की स्थिति से अगर हम आजादी के समय की स्थिति से तुलना करें तो आप उसे बेहतर नहीं कह सकते हैं, क्योंकि- समझौते और शांति के प्रयास के साथ-साथ युद्ध की स्थिति भी बरकरार रही है । इतिहास पर नजर डालें तो विभाजन (1947) में हुआ और साथ-साथ तीन युद्ध (1947-48,1965, तथा 1971) हुए । इसके अतिरिक्‍त शिमला समझौता (1972), लाहौर-घोषणा-पत्र (1999) के साथ कारगिल युद्ध (1999)- असफल आगरा शिखर वार्ता (2001), इस्लामाबाद संयुक्‍त वक्‍तव्य (2004) भी शामिल हैं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इन सारे प्रयासों के बावजूद, सीमा पार से आतंकवाद जारी है, तथा युद्ध की स्थिति हमेशा बनी हुई है, जिसमें दोनों देशों के हुक्मरान तथा वहां के अलगाववादी विचारधारा के लोग आज भी एक दूसरे पर आरोप लगाने से बाज नहीं आते । &lt;br /&gt;चाहे शाँति बहाली की तरफदारी भारत की तरफ से हो या पाकिस्तान की तरफ से मगर निर्णायक मोड़ पर लाकर उसे युद्ध की स्थिति में तब्दील करने में दोनों की भूमिकायें संदेहास्पद अवश्य हैं, क्योंकि इन दोनों देशों के हुक्मरान ये फैसले अपने लाभ व हानि के लिए तय करते हैं, न कि वहां की जनता के लिए जिससे बगावत व व्यवधान उत्पन्‍न होना स्वाभाविक ही है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;पहली बार सत्ता में गैर कांग्रेसी सरकार के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी ने, एक नयी सोच के साथ पाकिस्तान के साथ शाँति पहल के लिए लाहौर बस सेवा आरम्भ किया, जिसमें वे अपने शतरंज के बिछाए गये इस बिसात पर विफल रहे, क्योंकि कुछ ही दिनों बाद कारगिल जैसे युद्ध से भारत और पाकिस्तान के बीच बची-खुची मिठास भी कड़वाहट में तब्दील हो गयी । मगर वाजपेयी के इस सोच की पहल पाकिस्तान सरकार जो कि प्रजातांत्रिक शासन प्रणाली में नहीं थी, उसके तरफगार मुशर्रफ साहब ने आगरा-शिखर वार्ता के रूप में की । मगर जब बात कश्मीर मुद्दे की आयी तो वे अपनी कड़वाहट छुपा नहीं सके, और वर्ता वहीं आगरा के रेस्टोरेन्ट के टेबल पर ही सिमट गयी । इस बड़ी घटना क्रम में भारत ने भी अपना पैर पीछे नहीं किया, जिसकी वजह से कश्मीर की घाटियों में सैनिकों की चौकसी और बढ़ा दी गयी । &lt;/b&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक बार फिर वहां की जनता इन दोनों की खलबलाहटों की शिकार हुई । कभी पाकिस्तानियों ने घुसपैठ शुरू की तो इधर से भारत ने ब्लूचिस्तान तक अपना आक्रमण तेज रखा । मनमोहन सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल जो पाकिस्तान गया, जहां पर पाकिस्तान की जनता ने भी उसका जोरदार स्वागत किया, जिसके परिणाम स्वरूप दोनों देशों के बीच संबंधों में कड़वाहटें लोगों से निकलकर केवल हुक्मरानों के बीच ही बनी रहीं । मगर एक बार फिर अचानक मुशर्रफ की सरकार खतरे में आयी और वहां की सरकार बदल गयी, उसी दौरान बेनजीर भुट्टो की दुर्घटना से पाकिस्तान का अंदरूनी राजनीतिक समीकरण भी बदल गया । जहां पाकिस्तान वहां के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को न चुनकर, बेनजीर भुट्टो के सहानुभूति के चलते उनके पार्टी को सत्ता में वापस लायी तो लगा कि कश्मीर समस्या एक नये सिरे से शुरू होकर शांतिपूर्ण रूप से इसका समाधान निकल जायेगा, परन्तु समय के साथ, जरदारी का भी तेवर सातवें आसमान पर आ गया और जब इसकी पहल के लिए हाल ही में वहां के विदेशमंत्री बुशुरी भारत दौरे पर आये तो वो भी वही राग अलापने लगे । &lt;br /&gt;जहां तक कश्मीर समस्या का प्रश्न है, वो मात्र एक बहाना है भारत और पाकिस्तान का विभाजन, जिसकी वजह से लोग भारत और पाकिस्तान विभाजन का एक दूसरे से बदला लेना चाहते हैं और जब जिसको मौका मिलता है, वो कश्मीर मुद्दे को उछालकर युद्ध का राजनीतिक माहौल बना देता है । &lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/TGkw9pEIwqI/AAAAAAAAANc/HqWBqwWOo3A/s1600/body.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://2.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/TGkw9pEIwqI/AAAAAAAAANc/HqWBqwWOo3A/s320/body.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;क्योंकि किसी भी देश की जनता जो आज के समय में दो वक्‍त की रोटी के जुगाड़ में लगी है, जो अपने आप को व्यस्त रखना चाहती हैं वो कभी भी किसी चीज के लिए युद्ध के लिए तैयार नहीं हो सकती, क्योंकि सरहदों पर लकीरें जो इंसान बनाना चाहता है, वह यह अवश्य भूल जाता है, कि सरहदें हमेशा-हमेशा के लिए नहीं होतीं, वो कभी-भी बनायी और बिगाड़ी जा सकती है । क्योंकि कभी बाबर ने भी यह सपना नहीं देखा होगा जो उसने अपनी सरहदें निर्धारित कीं वो बरकरार नहीं रह पायेंगी ।&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;खैर इतिहास जो भी हो, हमें अपने भविष्य के लिए, इस वर्तमान में कुछ कठोर निर्णय अवश्य लेने पड़ेंगे । जिससे देश के इस अभिन्‍न भाग में शांति बरकरार हो सके । &lt;br /&gt;सरकार चाहे किसी भी पार्टी की हो, उसे एक आम सहमति बनाकर, जो आग कश्मीर में धधक रही है, उसे निष्पक्ष होकर बुझाना होगा, क्योंकि एक बार की मौत अच्छी होती है, उसके बजाय जो किश्तों में मिले । &lt;br /&gt;अर्थात सरकार को अपने अभिन्‍न अंग में सामान्य राज्यों की तरह से व्यवस्था शुरू कर, इस समस्या से निजात अवश्य पाना होगा नहीं तो- संसद पर हमला, ताज पर हमला, और इस तरह के न जाने कितने हमले अवश्य देखने को मिलते रहेंगे । और कश्मीर धरती की जन्‍नत न होकर कुरूक्षेत्र अवश्य बन जायेगा, जिसमें इंसान रोज ब रोज दफन होता रहेगा और इंसानियत का संदेश, शांति का प्रतीक कहा जाने वाला भारत अपने आपको कभी भी माफ नहीं कर सकेगा, क्योंकि कहावत है-&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;b&gt; “ बिना बलिदान के इतिहास नहीं लिखे जाते&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; ना ही, उसका कोई महत्व होता है । ”&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; जय हिंद&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; मुकेश पाण्डेय&amp;nbsp;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3617770739116937767-3358217441417556854?l=mukeshgkp.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/feeds/3358217441417556854/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2010/07/blog-post.html#comment-form' title='7 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/3358217441417556854'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/3358217441417556854'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2010/07/blog-post.html' title='**बात निकली है, तो दूर तलक जायेगी***'/><author><name>mukesh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13668566544256037971</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/-wI9zXReltOU/TbKZvak746I/AAAAAAAAAQQ/yyW68uqMV8E/s220/asd.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/TGkwu86RzzI/AAAAAAAAANM/SjKRQ8PQ71E/s72-c/kash.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>7</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3617770739116937767.post-645994298675367762</id><published>2010-06-29T02:43:00.000-07:00</published><updated>2010-07-01T01:19:46.207-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='विकास की राजनीति में फँसा बिहार'/><title type='text'>विकास की राजनीति में फँसा बिहार</title><content type='html'>&lt;b&gt;जाने क्या होगा वाद और विवाद में फँसे बिहार का? जहाँ एक तरफ बिहार की जनता एक अरसे के बाद कुछ चंद साल मौजूदा सरकार के शासन काल में चैन की साँसें ले रही थी कि अचानक आगामी चुनाव से पहले गठबंधन सरकार में पड़ती दरारों की वजह से वहाँ के लोगों में भी काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई है । &lt;/b&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज बिहार की स्थिति जहाँ सदृढ़ हो रही है, और विकास पुरूष के रूप में नितीश कुमार ने बिहार को एक अच्छी स्थिति में ला खड़ा किया है, वह काफी सराहनीय एवं असाधारण है, लेकिन आखिरकार आगामी चुनाव के पहले एक नये विवाद की वजह से बिहार की जनता में भी काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई है । जहाँ एक तरफ स्वयं नीतिश कुमार ने बिहार में धर्म-जाति से ऊपर उठकर लोगों को विश्‍वास जताया है, वहीं चुनाव से पहले स्वयं नीतिश कुमार को भी राजद, कांग्रेस व लोजपा की तरह &lt;b&gt;मुस्लिम तुष्टिकरण&lt;/b&gt; रास आ रहा है, तभी तो उन्हें नरेन्द्र मोदी व वरूण गाँधी द्वारा चुनावी रैली में हिस्सा लेने से ऐतराज है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  स्वयं नीतिश कुमार बिहार में हुए चहुमुखी विकास के दावे के बल पर चुनाव लड़ना चाहते थे, वहीं अचानक उनका रुख कैसे बदल गया? सोचने वाली बात है, जिस गठबंधन के सहारे उन्होंने बिहार को सुशासन प्रदान किया है, वो आज अचानक चिंता का विषय कैसे बन गया? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  कहीं ऐसा तो नहीं कि यह उन्हें कांग्रेस द्वारा दिये गये प्रलोभन व वाहवाही के नतीजे हैं या कहीं ऐसा तो नहीं कि उनकी नजर 16% मुस्लिम वोट बैंक पर है? या कहीं ऐसा तो नहीं कि उन पर भाजपा का अतिरिक्‍त दबाव या अंकुश हो, जो उनकी छवि को धूमिल कर रहा हो ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  इसमें कहीं न कहीं आपसी तालमेल की कमी कहें या जनता जनार्दन को मूर्ख बनाने वाली बात, साफ नजर आ रही है । अगर ऐसा नहीं है, तो नरेन्द्र मोदी के खिलाफ खोले गये मोर्चे की वजह की गुत्थी सुलझाना आसान नहीं होगा, क्योंकि जिस नरेन्द्र मोदी के बारे में वो बता रहे हैं, उस नरेन्द्र मोदी के बारे में बिहार क्या पूरे भारत की जनता की एक ही राय है, एक ही छवि है, और वो है विकास पुरूष की- क्योंकि स्वयं सदी के महानायक से लेकर वो सारे विकसित देश जिन पर हमारे देश की अर्थव्यवस्था टिकी हुई है, उनके कार्य करने के तरीके के लिए सराहना करते हैं । तो इससे एक बात तो अवश्य स्पष्ट हो जाती है, और वो है,&lt;b&gt; “विकास पुरूष की होड़”&lt;/b&gt; जिससे भारत के इन मुख्यमंत्रियों में किसे विकास पुरूष के दर्जे का पैटेन्ट मिले । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  नितीश कुमार और भाजपा गठबंधन में पड़ती दरारों की वजह दूसरे ही तरफ इशारा कर रहा है, और वो है, सरकार द्वारा चुप्पी साध कर कराये गये चुनाव सर्वेक्षण जिसके तहत अगर  JDU  अगर अकेले चुनाव लड़े तो उसे 243 में से 120 सीटें हासिल हो सकती हैं । जो कि महज दो सीट ही बहुमत के लिए कम है, जिससे उसको 40 सीटों का फ़ायदा हो सकता है, जबकि अगर वह भाजपा गठबंधन के साथ लड़ती है, तो उसका फ़ायदा कम हो जायेगा । अगर दोनों गठबंधन में लड़ते हैं, तो BJP को 54 से 60 सीटों का तथा JDU  को केवल 81-95 सीटों का फ़ायदा होता है, जो काफी कम है । JDU  के फ़ायदे की वजह 16% मुस्लिम कोट बैंक है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; अगर हम बिहार के विकास की बात करें तो इसमें कोई दो राय नहीं की संतोषजनक विकास हुआ है । जहाँ स्वयं नीतिश कुमार चहुमुखी विकास का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बिहार का भविष्य एक नये अंधकार की ओर अवश्य ले जा रहे है । अगर बिहार की मौजूदा स्थिति के बारे में बात करे तो सड़कों की मरमत्तीकरण से लेकर हर गाँवों में विद्युतीकरण का कार्य प्रगतिशील है, मगर चिकित्सा व्यवस्था और मेडिकल कालेजों में व्यवस्था जर्जर स्थिति में ही है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  शिक्षा प्रणाली के विकास पर नजर डालें तो इसका हाल कुछ और ही दर्शाता है, केवल प्राथमिक शिक्षा में सुधार करने की कोशिश राजनीतिक तरीके से हुई हैं, क्योंकि वहां शिक्षामित्र जो पंचायत के प्रतिनिधियों द्वारा नियुक्‍त किये गये हैं, वे आयोग्य ही नहीं बल्कि प्रतिनिधियों से लेकर मंत्रियों के जेब खर्चे का परिणाम हैं । जिन्हें सिलेबस तक की जानकारी नहीं है, आंगनबाड़ी योजना के तहत एवं प्रधानमंत्री द्वारा दोपहर के भोजन की राजनीति की वजह से स्कूलों में शिक्षा नाम के शब्द को हटाकर खिचड़ी को तवज्जो दिया जा रहा है, जहां बच्चे शिक्षा नहीं राशन ग्रहण करने जा रहे हैं । जहां सरकार इसे कुछ लोगों को रोजगार देने का विश्‍वास दिला रही है, वहीं हजारों, लाखों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी कर रही है, इसे हम क्या समझें विकास या और कुछ? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  आज की तारीख में जहां सरकार लगभग कार्यकल पूरा करने जा रही है, वही उच्च शिक्षण संस्थानों में कोई सुधार नहीं हुआ है? ना ही माध्यमिक शिक्षा, ना ही उच्चमाध्यमिक तथा ना ही स्नातक और स्नातकोत्तर के संस्थानों में इजाफा, बल्कि इजाफा तो दूर उसके हालात और जर्जर होते जा रहे हैं, जिसके फलस्वरूप वहां के लोगों को आज की तारीख में भी अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ रहा है । &lt;br /&gt;  रोजगार के विकास के बारे में बात करें तो वहां के लोगों को न तो कोई आश्‍वासन ही मिला है, न ही वहां कोई औद्यौगिक विकास ही हुआ है, जिसके लिए उन्हें, कभी शिवसेना से मार खानी पड़ती है, तो कभी असम में रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा में असमियों द्वारा प्रताड़ना भी सहनी पड़ती है, जवाब में सरकार कभी शिवसेना को तो कभी असम सरकार को जिम्मेदार ठहराती है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  आज की तारीख में भी बिहार की जनता बिहार से अधिक अन्य राज्यों में रोजगार तलाशती है, जिसका उदाहरण है, बिहार से भारत के किसी भी कोने में जाने वाली ट्रेनों में बिहारियों की भीड़ । जिस विकास की दर का दावा यहां की सरकार कर रही है, वह केवल दस्तावेजों में ग्राफों तक ही, तथा मंत्रियों के लाइफस्टाइल पर ही झलक रही है, न की आज जनता को नये रोजगार मिल रहे हैं । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  हाँ, वहां प्रशासन अवश्य चुस्त-दुरूस्त हुआ है, एक संतोषजनक बात है कि अब वहां बाहुबली या तो जेल में हैं, या तो सरकार में मिल गये हैं, जिस गुंडा राज से बिहार की जनता त्रस्त थी वो अवश्य कम हुआ है, मगर नौकरशाह अवश्य जनता का शोषण कर रहे हैं, एक सामान्य कार्य के लिए भी थानाध्यक्ष से लेकर बड़े आला अफ़सर मुहमाँगी रकम माँगते हैं, जो कि ‘गुण्डाराज से कम भयावह नहीं है ।’&lt;br /&gt;  पूरे प्रदेश में सरकार के एक नये गठन के रूप में ’सैप’ अतिरिक्‍त पुलिस बल ने लोगों को राहत अवश्य पहुँचायी है, जिसका लगभग 70 फ़ीसदी खर्च केन्द्र सरकार वहन करती है और मात्र 30 फ़ीसदी खर्च राज्य सरकार वहन करती है । कुल मिला-जुला कर यह काफी सराहनीय है, क्योंकि जनता चैन से रात को सो अवश्य लेती है । &lt;br /&gt;  अन्ततोगत्वा हम सरकार की कार्य प्रणाली पर अंगुली तो नहीं उठा सकते क्योंकि यहां की स्थिति इतनी बदत्तर हो चुकी थी कि जिसे सही करने में समय तो अवश्य लगेगा, लेकिन हम इसे संपूर्ण विकास, चहुमुखी विकास भी तो नहीं कह सकते । रह गई विकास की राजनीति की बात तो सरकार को ऐसे कदम अवश्य उठाने चाहिए जिससे आने वाली कोई भी सरकार चाहे वो किसी भी पार्टी की हो, उसका अनुसरण अवश्य करे न की उसको राजनीतिक फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करे । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  &lt;b&gt;क्योंकि जनता को क्या चाहिए शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय करने की सुविधा इत्यादि, जिसे जनता सहज ग्रहण कर सके, तभी हो सकता है ’चहुमुखी विकास’ ।&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  और चहुमुखी विकास के लिए चाहिए कि नितीश कुमार की छवि जो लोगों ने देखी थी वे उसे बरकरार रखें, विकास को राजनीतिक हवा या धर्म और जाति के एजेंडे से न जोड़े, उसे अन्य पार्टियों के लिए छोड़ दें । मगर वे स्वयं और उनके चहेते गठबंधन तथा स्वयं अपने लोगों में दरार की वजह न बनें, वो किसी भी अन्य सरकार, नेता पर बयानबाजी न करें, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचे ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3617770739116937767-645994298675367762?l=mukeshgkp.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/feeds/645994298675367762/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2010/06/blog-post.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/645994298675367762'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/645994298675367762'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2010/06/blog-post.html' title='विकास की राजनीति में फँसा बिहार'/><author><name>mukesh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13668566544256037971</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/-wI9zXReltOU/TbKZvak746I/AAAAAAAAAQQ/yyW68uqMV8E/s220/asd.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3617770739116937767.post-5183784887473219207</id><published>2010-05-09T00:58:00.001-07:00</published><updated>2010-05-17T04:42:58.772-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नक्सलवाद समस्या या विकल्प'/><title type='text'>नक्सलवाद समस्या या विकल्प</title><content type='html'>हाल के दिनों में पूरे देश को ही नहीं बल्कि पूरे जनमानस को झकझोर देने वाली घटना घटित हुई जिसमें 100 से अधिक जाने गयीं, जिससे पूरा देश शर्मसार हुआ । यह अलग बात है, कि यह पहली बार नहीं हुआ, और ना ही पहली बार शहीदों की तिलांजलि के बाद हम उन्हें भूलने कि कोशिश किए । आज हमारा देश जो कभी पड़ोसी मुल्कों से तो कभी अपने ही लोगों के द्वारा बार-बार ऐसी घटनाओं का शिकार होता जा रहा है, और हम इसे सहज ही स्वीकार करते जा रहे हैं और हमारी मीडिया भी इस मामले में कम नही है, क्योंकि कभी नक्सली मारे जाते हैं तो ग्रीनहंट तथा , कभी जवान मारे जाते हैं तो इसे सूचना की कमी और असंतोष का कारण सिद्ध करने में लग जाते हैं । खैर वजह जो भी हो हम और हमारी सरकार इसे केन्द्र और राज्य सरकार के बीच सही तालमेल नहीं होने की वजह बताकर अपनी जिम्मेदारियों से छुटकारा पा लेते हैं । अगर ऐसा नहीं होता तो ये दंतेवाड़ा की घटना की पुनरावृत्ति नहीं होती और ना ही इतनी भारी संख्या में जवान शहीद होते ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वास्तव में अगर देखा जाय कि नक्सलवाद क्या है? और इसका विकल्प क्या है? तो हर व्यक्‍ति इसका उत्तर शायद एक ही दे वो ये कि, यह असंतोष का बिगड़ा एक ऐसा स्वरूप है, जो उन लोगों के द्वारा चलाया जा रहा है, जिससे उनका कोई लेना देना ही नहीं है । अगर इसके इतिहास पर प्रकाश डालें तो -&lt;br /&gt;" नक्सलवाद कम्यूनिस्ट क्रांतिकारियों के उस आंदोलन का अनौपचारिक नाम है, जो भारतीय कम्यूनिस्ट आंदोलन के फलस्वरूप उत्पन्‍न हुआ । नक्सल शब्द की उत्पत्ति पश्‍चिम बंगाल के छोटे से गाँव नक्सलवाड़ी से हुयी है, जहां भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता चारू मजूमदार और कानू सान्याल ने 1967 में सत्ता के खिलाफ एक सशक्‍त आंदोलन की शुरूआत की थी । मजूमदार कम्यूनिस्ट नेता माओत्से तुंग के बहुत बड़े प्रशंसकों में से थे, और उनका मानना था कि भारतीय मजदूरों और किसानों की दुर्दशा के लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं, जिसकी वजह से उच्च वर्गों का शासन तब का कृपितंत्र पर दबदबा हो गया है । जिसे सिर्फ सशक्‍त क्रांति से ही खत्म किया जा सकता है ।"&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;1967 में “नक्सलवादियों ने कम्यूनिस्ट क्रांतिकारियों की एक अखिल भारतीय समन्वय समिति बनाई, जो कम्यूनिस्ट पार्टी से अलग हो गये, और सरकार के खिलाफ भूमिगत होकर सशस्त्र लड़ाई छेड़ दी । 1971 में आंतरिक विद्रोह हो गया । मजूमदार की मृत्यु के पश्‍चात्‌ इस आंदोलन की बहुत सी शाखायें बन गईं जो आपस में प्रतिद्वंदिता भी करने लगीं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज कई राजनीतिक पार्टियां जो वैधानिक रूप से स्वीकृत हैं, उनकी पृष्ठ भूमि नक्सली संगठन के रूप में ही रहा है । और वे संसदीय चुनावों में भाग भी लेती है, लेकिन बहुत से संगठन अब भी मजूमदार के सपने को साकार करने में लगे हुए हो । नक्सलवाद की सबसे बड़ी मार आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड, और बिहार को झेलनी पड़ रही है । आज हमारा देश जो अपने आपको हर दिशा में हर क्षेत्र में समर्थवान समझ रहा है, क्या वह इन छोटी समस्याओं से निजात पाने में सक्षम नहीं है, अगर ऐसा नहीं है, तो हर 15 अगस्त और 26 जनवरी के पूर्व संध्या पर यहां के प्रतिनिधियों द्वारा दिये गये संवाद झूठे और ढकोसले के अलावा कुछ नहीं है । अगर उनके वक्‍तव्य वास्तव में दस्तावेजों के द्वारा सही रूप से आकलित हैं, तो इसका अर्थ है, कि सरकार और उनके सहयोगी इसे खत्म नहीं करना चाहते हैं , और उसे राजनीतिक हवा देना तथा उसके बाद चुनावी मुद्दे में तब्दील करना चाहते हैं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आजकल तो एक अलग तरह की संस्था का उदय ही हो गया है, जिसका नाम है- ‘मानवाधिकार संस्थान’ जिसकी पारदर्शिता पर संदेह करना उचित है, क्योंकि ये वही मुद्दे उठाते हैं, उनकी ही फरियाद करते हैं, जो समाज के शत्रु हैं, देश के शत्रु हैं । इनको देश व समाज से कोई लेना देना नहीं, क्योंकि (भाई) ये तो मानव रक्षा की बात करते हैं, मगर ये हमेशा यह भूल जाते हैं, कि देश पर शहीद होने वाले जवान चाहे वह सेना का हो, सीआरपीएफ का हो या पुलिस के जवान ही क्यों न हो उनके लिए , मानव नहीं है , उसके लिए न कोई समाज सेवी ही आगे आता हो ना ही मानवाधिकार वाले ही आगे आते हैं । इनके शब्दकोषो में न तो जवानों का कोई परिवार होता है, ना ही उन पर कोई आश्रित ही होता है । हां मैं सिर्फ इतना ही कहूँगा कि नक्सली आतंकवादियों के मानवाधिकार तो मानवाधिकार है, लेकिन रोज वास्दी सुरंगों के विस्फोटों से मारे जा रहे, जवान और हजारों निरीह जनता के मरने पर उनके अधिकारों के बात करने वाले पत्रकारों को क्या साँप सूंघ जाता है?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मेरे लिखने का मकसद सिर्फ यह है, कि नक्सलवाद आज हमारे सामने एक ऐसी समस्या है, एक ऐसी चुनौती है, जिसके विरोध में हमें एकजुट होकर इसे समाप्त करना ही होगा । यही समाज के लिए भी कल्याणकारी है, तथा देश के लिए भी । अगर आप लोगों में किसी को यह लगे कि हम किसी समस्या का समाधान बेगुनाहों की जानें लेकर कर सकते हैं, समाज को तोड़कर या देश को तोड़कर कर सकते हैं, तो ऐसा संभव नहीं है । इसके फलस्वरूप कहीं ऐसा न हो कि एक असंतोष को समाप्त करने के लिए हम हजारों असंतोष को जन्म दे दें ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जय हिंद&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3617770739116937767-5183784887473219207?l=mukeshgkp.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/feeds/5183784887473219207/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2010/05/blog-post.html#comment-form' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/5183784887473219207'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/5183784887473219207'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2010/05/blog-post.html' title='नक्सलवाद समस्या या विकल्प'/><author><name>mukesh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13668566544256037971</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/-wI9zXReltOU/TbKZvak746I/AAAAAAAAAQQ/yyW68uqMV8E/s220/asd.jpg'/></author><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3617770739116937767.post-1037458234904137174</id><published>2010-03-12T23:56:00.000-08:00</published><updated>2010-03-13T00:15:44.328-08:00</updated><title type='text'>नेता बनाम राजनेता</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/S5tFy9UMxJI/AAAAAAAAAKU/jYZwcjdTd84/s1600-h/mk2.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 300px; height: 200px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/S5tFy9UMxJI/AAAAAAAAAKU/jYZwcjdTd84/s400/mk2.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5448024915989808274" /&gt;&lt;/a&gt;नेता बनाम राजनेता जैसा कि आप सब परिचित होंगे इन शब्दों से, और उन लोगों से भी जो ये होने का दावा करते है, तथा जो होगे भी, और थे भी । ये शब्द न तो किसी कवि की कल्पना है, न ही किसी लेखक का काल्पनिक पात्र ही है, ये वो शब्द है, जिनकी वजह से हमारे वजूद बने, बिगड़े और बार-बार किसी न किसी घटना एवं दुर्घटना के संयोयक रहे है । जिस प्रकार किसी विद्यालय मे अध्यापक का उत्तरदायित्व उस विद्यालय के छात्रों के प्रति होता है, किसी परिवार के मुखिया का उसके पूरे परिवार के प्रति होता है, वैसे ही नेता उत्तरदायी होता है, उस समाज का, उस देश का । &lt;br /&gt;          कहने सुनने मे तो बहुत ही कम अन्तर लगे शायद नेता व राजनेता में परन्तु दोनो एक दूसरे से काफी भिन्‍न है । जब हमारा देश गुलाम था तब नेता हुआ करते थे । चाहे, वो गाँधी हो, सुभाष हो या लाला जी हो । ऐसा नही की तब राजनेता नही थे, या आज नेता नही है, या हुए नही । जब नेता में सत्ता लौलुप्ता, लालच, बेईमानी, जैसे गुण जुड़ जाते है । तो वही बन जाता है, राजनेता ।&lt;br /&gt; मैंने इन सारी बातों पर प्रकाश डालने का प्रयास नही किया कि , आप इन सब चीजों से परिचित नही होंगे, अपितु ये सारी चीजे ही इनमें अन्तर स्पष्ट करती है । आज हमारा देश जो विश्‍व का सबसे बड़ा एक प्रजातांत्रिक देश है, जहां इतनी जनसंख्या के बावजूद, इतने भेदभाव के बावजूद व्यवस्थित या अव्यवस्थित रुप से दिन व दिन प्रगति की ओर अग्रसर है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; वास्तव में अगर देखा जाय तो देश की बागडोर जिन हाथों में है, तथा अधिक दिनो तक रही है, वह कहीं न कहीं प्रजातांत्रिक होने के दावे को शत प्रतिशत सही नही ठहराता है । कांग्रेस जो आज सत्ता मे हैं, तथा आजादी से अब तक सबसे अधिक दिनो तक राज्य किया है, उससे राजतंत्र की परिछाई साफ नजर आती है । और इसे हम तो क्या स्वंय कांग्रेस के राजघराने के सदस्य भी स्वीकार करते है । कांग्रेस जो आजादी से लेकर आज तक देश में शासन कर रही है, उसमें नेताओं की कमी और राजनेताओं की अधिकता स्पष्ट रूप से सामने आ रही है । &lt;br /&gt;            आज जो कांग्रेस के युवराज जो आम जनता मे एक नेता की छवि बना रहे है वो अवश्य सराहनीय है, परन्तु कांग्रेस उन्हें, नेता नही राजनेता बनाना चाहती है, शायद उनकी भी दिलचस्पी यही हो सकती है । क्योंकि कांग्रेस का इतिहास रहा है, कि जो नेता आम लोगो में अपनी पहचान एक सच्चे राष्ट्रभक्‍त एवं जनता की सेवा के लिए बल पर बनाता है, उसे या तो निलंबित किया गया है, या वो घटना एवं दुर्घटना का शिकार अवश्य हुआ है । इसमे कांग्रेस की मर्जी रही हो या नही आप अवश्य समझ सकते है । &lt;br /&gt;           सबसे पहला उदाहरण है, जब देश गुलाम था । तो नेता जी सुभाष चन्द बोस को राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया, परन्तु दुर्भाग्यवश उनकी लोकप्रियता की वजह से या कार्यकुशलता की वजह से या फिर राजगद्दी की लालच के लिये उन्हे हटाकर जवाहर लाल नेहरू को देश का राजनेता नियुक्‍त किया गया ।ऐसे कई उदाहरण आप स्वंय पा सकते है, चाहे वो संजय गाँधी का विमान दुर्घटना हो या राजेश पायलट या आखिरकार वाई० एस० आर० रेड्डी का दुर्घटना ही क्यों नही- ये सारी घटनाए एवं दुर्घटनाए सिर्फ और सिर्फ नेता बने रहने या देश उत्थान मे अपने योगदान के जिद्द की वजह हो सकती है । &lt;br /&gt;            मेरा संदेहास्पद टिप्पणी करने का अर्थ यह नही कि मैं अपने ही विचारो से सहमत नही हूँ या फिर यह एक कोरी कल्पना है । मेरे अंदर केवल एक भय है, वो है कि मैं चाहते हुए या न चाहते हुए नेता न बन जाऊ, जिससे मैं या (आप) ऐसी घटना का शिकार हो जाये । मेरी इस टिप्पणी से आपलोगों को ये लगे शायद कि मै नेता बनाम राजनेता को छोड़ किसी पार्टी विशेष पर यह आरोप लगा रहा हूँ , और किसी अन्य नेता या पार्टी का जिक्र नही कर रहा हूँ, तो ऐसा नही है । आज के परिदृश्य मे कोई भी पार्टी, कोई भी नेता, राजनेता बनने की होड़ से पीछे नही है, चाहे वो भाजपा के पार्टी सुप्रीमो आडवाणी ही क्यों न हो । जिन्होंने बड़े ही आसानी से यहां के लोगों पर धर्मवाद के पक्षधर बनकर यहां की जनता के दिलो पर राज्य करना चाहा, परन्तु अन्ततः सत्ता का मोह ने उन्हें तथा स्वयं पार्टी का भी काफी नुकसान किया । क्योंकि आप कितना भी दिखावा कर ले कितने भी अपने दिखावेपन को असलियत में तब्दील करने की कोशिश कर ले सच्चाई अन्ततः सामने तो आ ही जाती है । &lt;br /&gt;            वरना पूरा हिंदुस्तान जहां एक बदलाव के रूप में उन राजनेताओं से मुक्‍ति के लिए इन्हें सत्ता का भार सौपा, तो इनको लगा कि अब तो ये हमारी पुस्तैनी हो चुकी है, हम भी वैसे ही जनता को मूर्ख बनायेंगे जैसे अन्य करते आये है । इन्हे शायद यह नही लगा था कि जो जनता आपको सिर्फ एक मंदिर के मुद्दे पर सत्ता में वापस ला सकती है, वही जनता सारे मुद्दे होने के बाद चाहे वह महंगाई का हो, आतंकवाद का हो, भ्रष्टाचार का ही क्यों न हो आपको मौका भी नही दे सकती । इस पार्टी के नेता भी इसी बिमारी से पीड़ित हो चुके है, जो राजनेता बनने का स्वप्न है, उन्हें, उनके उत्तरदायित्वों से दूर करता जा रहा है । और अन्य पार्टियां, तो कहिए मत ये भी अपने को कम नही आकते है । चाहे लालू यादव का अपनी ही पत्‍नी को सत्ता मे बनाये रखना हो या मुलायम सिंह का पुत्र मोह और प्रिय मित्र अमर सिंह का अलग होना । &lt;br /&gt;         ये सारी घटनाये सिर्फ राजनेता बनने की चाहत के नतीजे है । जिसे भुगतना आम आदमी को पड़ता है, और मूल्य चुकाना पड़ता है इस देश को-&lt;br /&gt;           क्योंकि ये सारे राजनेता, मर्यादाहीन, अतिउत्तेजक एवं विवेकहीन है, जिन्हें स्वयं अपनी मर्यादा तक ख्याल तक नही, वो क्यों किसी देश व समाज का उत्थान करेंगे -&lt;br /&gt;               हमें सोचना होगा इन राजनेताओं के बारे में, नही तो हम जीवन भर अपने-आप को कशूरवार ठहराते रह जायेंगे । &lt;br /&gt;                                                                            जय हिन्द !&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3617770739116937767-1037458234904137174?l=mukeshgkp.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/feeds/1037458234904137174/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2010/03/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/1037458234904137174'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/1037458234904137174'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2010/03/blog-post.html' title='नेता बनाम राजनेता'/><author><name>mukesh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13668566544256037971</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/-wI9zXReltOU/TbKZvak746I/AAAAAAAAAQQ/yyW68uqMV8E/s220/asd.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/S5tFy9UMxJI/AAAAAAAAAKU/jYZwcjdTd84/s72-c/mk2.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3617770739116937767.post-4136733303640901631</id><published>2010-03-09T21:05:00.000-08:00</published><updated>2010-04-09T02:44:59.143-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='women reservation'/><title type='text'>WOMEN RESERVATION</title><content type='html'>Through &lt;a href="http://www.samaydarpan.com/april/vishesh.aspx/"&gt;women reservation &lt;/a&gt;only politician are satisfied not all citizens of our country . I think this is starting of India's ruined.&lt;br /&gt;Its starting a partiality among gender after community,religion and cast.&lt;br /&gt;I condemn all politicians those were in fever of this bill .they only shows what they want to disturb a our society and country and making only vote bank.bcz mostly guys are foolish and selfish right now.Which can raise big problem for country development and ,it can go as interim war in country like &lt;a href="http://www.samaydarpan.com/april/vicharmanthan.aspx"&gt;naxals&lt;/a&gt; and so on.I think government organize terrorism and may involve in such activity . They do not pass bill against rising inflation,terrorism,disaster,corruptions etc.But they definitely pass bill for reservation of minority,OBC,SC/ST and for women.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Finally I argue to all responsible persons those have mercy over country ,they condemn this.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Jai Hind.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3617770739116937767-4136733303640901631?l=mukeshgkp.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/feeds/4136733303640901631/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2010/03/women-reservation.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/4136733303640901631'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/4136733303640901631'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2010/03/women-reservation.html' title='WOMEN RESERVATION'/><author><name>mukesh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13668566544256037971</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/-wI9zXReltOU/TbKZvak746I/AAAAAAAAAQQ/yyW68uqMV8E/s220/asd.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3617770739116937767.post-930883177012679769</id><published>2010-01-01T00:19:00.000-08:00</published><updated>2010-01-03T08:36:59.950-08:00</updated><title type='text'>अंत भला तो सब भला</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/Sz2xeZPxTeI/AAAAAAAAAKI/dtliBR23Eko/s1600-h/happy-new-year-wallpaper-19.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 400px; height: 257px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/Sz2xeZPxTeI/AAAAAAAAAKI/dtliBR23Eko/s400/happy-new-year-wallpaper-19.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5421684662155169250" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कहावत है, अंत भला तो सब भला, ऐसा लिखने के लिए मैंने इसलिये सोचा क्योंकि २००९ की अंतिम शाम है, आज 31 दिसम्बर हैं, और यह इसलिए मैने सोचा कि----&lt;br /&gt; इस साल में हजारों उतार-चढ़ाव देखने को मिले अंतत: हम इसे सुखद कह सकते हैं । &lt;br /&gt;माना कि २००९ में ही मंदी का असर पूरे विश्‍व में छाया रहा, लेकिन अंततः यह साल के आखिर में छंटा तो सही- &lt;br /&gt;२००९ में ही तो भारत खेल की दुनिया में रिकॉर्ड ऑफ बुक में छाया रहा । विशेषकर क्रिकेट इतिहास का यादगार साल तो रहा सचिन तेंदुलकर ने जहाँ नये-नये कीर्तिमान स्थापित किये वहीं, सहवाग का कैरियर जो डाउन हो रहा था, एक नई ऊँचाई को छू गया और अंततः अंग्रेज खिलाड़ी को दशक का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया । &lt;br /&gt;यह अलग ही बात है कि अन्य क्षेत्रों में हम उतनी तरक्‍की नहीं कर सके- सुरक्षा के दृष्टिकोण से कभी पाकिस्तान की तरफ से खतरा मंडराया तो कभी, समय-समय पर चीन ने अंदर घुसने का प्रयास भी किया । कहीं-कहीं घुसपैठ तो हुआ लेकिन बड़ा आतंकवादी हमला नहीं हो सका, जो यह पुष्टि करता है कि चिंदबरम साहब ने हिसाब-किताब के अलावा आंतरिक सुरक्षा भी दुरूस्त रखी- &lt;br /&gt;राजनीतिक क्षेत्र में भी अपने देश का परचम रहा । स्वयं प्रधानमंत्री व्हाइट हाउस के चीफ गेस्ट रहे । भले ही हम कोपेनहेगन वार्ता में उन्हीं लोगों के द्वारा आलोचना के शिकार हुए ।  मौजूदा सरकार ने पूरे देश में अपना वोट बैंक बढ़ाया तो भाजपा का सूरज निस्तेज जान पड़ा । लौह पुरूष कहलाने वाले आडवाणी के लिये यह वर्ष कष्टदायी रहा वहीं, एक नये चेहरे के रूप में गडकरी ने नया जीवन देने का प्रण लिया । महाराष्ट्र में बाबा साहब को नकारकर लोगों ने राज की कमान को स्वीकारा । &lt;br /&gt;मायावती पूरे साल अपने कारनामों की वजह से तो कभी अपने नेतृत्व की वजह से विश्‍व में शक्‍तिशाली महिला के रूप में सोनिया की सूची में स्थापित हुईं । यह अलग ही बात है, कि अपने ही देश में लोगों ने और स्वयं न्यायपालिका ने उन्हें लताड़ा । &lt;br /&gt;सोनिया गाँधी विश्‍व में शक्‍तिशाली महिला की सूची में शीर्ष पर रहीं तो, राहुल गाँधी के काम करने के तरीके और विचारों की वजह से युवाओं ने उन्हें अपना रोल मॉडल बनाया । &lt;br /&gt;पूरा साल फिल्म जगत के लिए कारोबार के हिसाब से खराब तो रहा लेकिन सदी के सर्वश्रेष्ठ महानायक ने एक बार फिर अपने दर्शकों और चहेतों के लिए ओरो बनकर लोगों को चौंकाया, वहीं इडियट से ही सही कारोबार में तेजी और आमिर खान को इडियट बनना और कहलाना भी पसंद आया, यह अलग बात है कि अब बच्चे भगत सिंह नहीं बल्कि इडियट बनना अधिक पसंद करेंगे । इसी साल ने हमें 4 ऑस्कर दिलवाये, जो अपने आप में गौरव की बात है । &lt;br /&gt;इसी साल ही तो गे. लेस्बीयन को साथ रहने का अधिकार मिला है । जो कम से कम यह दर्शाता तो है, कि हम अब पश्‍चिमी देशों से इस मामले में तो पीछे नही हैं । भले ही कोई नया अनुसंधान नहीं कर सके तो क्या हुआ हमें लडाकू विमान मिसाइलें भले ही बाहर से खरीदने पड़े तो क्या हुआ हमें प्यार करने के लिए केवल विपरीत सेक्स पर तो निर्भर नहीं रहना पड़ेगा । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;और अन्त में सिर्फ मैं आप सबसे यही उम्मीद करता हूँ कि आप लोग भी “बीती बिसारि के आगे की सुधि लेई”का अनुसरण कर अपने देश व समाज को एक नया उपहार देंगे । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"आओ हम सब यह शपथ लें आज से &lt;br /&gt;न कोई द्वेष रहे अपने आप से ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; मरकर भी देश की रक्षा करेंगे हम, &lt;br /&gt;इस साल में सबसे आगे होंगे हम ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वीर भगत वन जायेंगे, देश की खातिर,&lt;br /&gt; भले ही कुर्बान होंगे हम ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;देश की शान बढ़ायेंगे हम, &lt;br /&gt;दुनिया में अपना परचम लहरायेंगे हम ।" &lt;br /&gt;                         - जय हिंद&lt;br /&gt;                                                                      मुकेश कुमार पाण्डे&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3617770739116937767-930883177012679769?l=mukeshgkp.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/feeds/930883177012679769/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2010/01/blog-post.html#comment-form' title='6 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/930883177012679769'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/930883177012679769'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2010/01/blog-post.html' title='अंत भला तो सब भला'/><author><name>mukesh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13668566544256037971</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/-wI9zXReltOU/TbKZvak746I/AAAAAAAAAQQ/yyW68uqMV8E/s220/asd.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/Sz2xeZPxTeI/AAAAAAAAAKI/dtliBR23Eko/s72-c/happy-new-year-wallpaper-19.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>6</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3617770739116937767.post-184877717476688268</id><published>2009-11-27T23:09:00.000-08:00</published><updated>2009-11-27T23:31:09.861-08:00</updated><title type='text'>देश का दुर्भाग्य (26/11)</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/SxDRjL4WvFI/AAAAAAAAAIY/xcKEJXZcH6g/s1600/Image0013.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://1.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/SxDRjL4WvFI/AAAAAAAAAIY/xcKEJXZcH6g/s200/Image0013.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;शायद किसी ने यह उम्मीद न किया हो कि एक तरफ हमारा देश प्रगति कर रहा है, नई ऊँचाईयों को छू रहा हैं । वही दूसरी तरफ एक निहायत ही कमजोर एवं लाचार होता जा रहा है, और हम इसके रखवाले, दिन व दिन अपंग होते जा रहे है । अगर ऐसा नही होता तो हर साल, हर महीने हम ऐसी घटनाओं के शिकार नहीं होते आज २६/११ के वर्षगांठ पर पूरा देश भावमीनी श्रद्धांजली दे रहा है । तो कोई उन शहीदों को पुष्पमाल्यार्पण कर रहा है । मैं पूछता हूँ कि क्या यह भावभीनी श्रद्धांजली, और उनकी याद में २ मिनट का मौन काफी है । उनके लिये या इस देश के लिए जिसका हदय बार-बार विद्रोहियों के द्वारा ब्यथित हो रहा हो । यह देश का दुर्भाग्य नही तो क्या है, यहाँ के रहने वालों के लिए शर्म की बात नहीं तो क्या है? यह एक ऐसा कलंक है जो मिटाये नही मिटने वाला है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुछ लोगों को श्रद्धांजली फिल्म बनाने से है, वो सोचते हैं कि हम फिल्मों के माध्यम से, रेडियों के माध्यम से यहाँ के लोगों को बदलेंगे, उनके सोच को बदलेंगे, लेकिन ऐसा होना, एक ऐसे स्वप्न की तरह है, जो शायद ही पूरा हो सके । क्योंकि बदलती तो वो चीजे हैं, जिसमें चेतना हो परन्तु दुर्भाग्यवश सारे चेत होते भी अचेत है । हम इसे ऐसे याद कर रहे, ऐसे प्रस्तुत कर रहे हैं, जैसे बहुत ही गर्व की बात हो । वो हमें बार-बार कभी २६/११ का तो कभी १९९३ बम-ब्लास्ट, तो कभी काशी संकटमोचन के रूप में चुनौती दे जाते है, और हम उसे राजनीतिक फायदे मे तब्दील करते जा रहे है । इसे हम क्या कहेंगे ।&lt;br /&gt;कहावत है, कि अपने घर में कुत्ता भी शेर होता है, लेकिन हम अपने को कहते शेर है, और हालत कुत्ते से बदत्तर है । कोई भी घटना होती है, चाहे वह रेल दुघर्टना हो, बस दुर्घटना हो, या बहुत बड़ी शाजिश के तहत देश पर हमला ही क्यों न हो, हम उसे दूसरे देश के द्वारा साजिश का नाम दे, अपना पिछा छुड़ा लेते है । हम किसी व्यक्‍ति या देश के खिलाफ पुख्ता सबूत होने के बावजूद कार्यवाही क्यों नहीं करते । क्यों दूसरे देशों के भरोसे रह जाते हैं । शायद इसलिये की हमारे पास धन नहीं है, शायद इसलिए की हमारे पास सैन्य बल का अभाव, और शायद इसलिए कि हमारे पास तकनीकी की कमी है । .... नहीं है, तो है, सिर्फ और सिर्फ सत्ता लौलुपता की और आत्मविश्‍वास की - अगर ऐसा नहीं होता तो, संसद भवन हमले के बाद यह २६/११ नहीं होता, और कदापि नही होता- इन सारी घटनाओ से हम सिर्फ अपने-आप को निकम्मे, कमजोर और लालची, बेईमान, मतलबी, साबित कर सकते है । हमारे लिए ऐसी घटनाये कोई माइने नहीं रखती इसे सिद्ध करने की किसी को जरूरत नही है, क्योंकि वे खुद ही गवाह है, अपने गुनाहों की- &lt;br /&gt;मैं पूछना चाहता हूँ, हर उस आदमी से जो थोड़ा भी अपने आप को वफादार या देश और समाज के प्रति जिम्मेदार समझता हो । अगर कोई आपके परिवार या आप पर जानलेवा हमला करता है, तो..&lt;br /&gt;&lt;b&gt;क्या वह दूसरे से या पड़ोसी से सहायता लेने के बाद अपनी रक्षा करेगा ? &lt;br /&gt;क्या वह पहले पंचायत बुलायेगा और फिर वह निर्णय लेगा कि उसे क्या करना चाहिये?-&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/SxDQ2fe1GCI/AAAAAAAAAIQ/6oP7vaNpmfU/s1600/2009-11-26__India.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://1.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/SxDQ2fe1GCI/AAAAAAAAAIQ/6oP7vaNpmfU/s320/2009-11-26__India.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;मेरा मानना है, कि नही कोई भी कानून कोई भी धर्म उसे अपनी रक्षा एवं परिवार की रक्षा करने की स्वीकृति अवश्य देगा-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मेरे लिखने का मकसद किसी को श्रद्धांसुमन अर्पित करना नहीं है, किसी देशभक्‍त को जो हमारी रक्षा के लिए अपने आप को नष्ट कर दिया उसके लिये उसकी श्रद्धांजली में उसे याद करना और फिर उसको राजनीतिक हवा देना नही है । &lt;br /&gt;“हमारा मकसद है, कि आप, हम सभी दृढ़ प्रतिज्ञ हो उनके बलिदानों की कीमत की वापसी की - जिस दिन हम,आप दृढ़ प्रतिज्ञ हो जायेंगे, फिर न कोई २६/११ होगा ओर ना ही ऐसी वर्षगांठ आयेंगी - ” &lt;br /&gt;किसी भी देश का भाग्य एवं दुर्भाग्य बनाते बिगाड़ते है, वहां के लोग । इतनी जनसंख्या के बावजूद हम इसे दुर्भाग्य के अलावा कुछ नहीं दे पा रहे है । क्योंकि हम अपना आकलन करने में असमर्थ है ! हमारे वर्त्तमान प्रधानमंत्री श्री डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने आप के बारे में बताया कि वह एक कमजोर प्रधानमंत्री नही है बल्कि वह एक शक्‍तिशाली और बहुत ही प्रभावशाली व्यक्‍तित्व वाले प्रधानमंत्री है । जिसका आकलन पूरे भारतवासी तो क्या वो हमलावरी भी कर चुके है । उन्होंने अपने आप को शक्‍तिशाली इसलिये बताया क्योंकि वे दोबारा सत्ता में वापस आये । उन्होंने यह नही कहा कि मैं एकमात्र ऐसा प्रधानमंत्री हूँ, जिसके समय में हजारों औरते विधवा हुई, जिनके कार्यकाल में हजारों बच्चे यतीम हुये, आखिरकार अफजल गुरू ने जिसे कमजोर और लाचार सरकार बताया ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हमारे बीच ऐसे हजारों सवाल जेहन में समय-समय पर अवश्य कोसेंगे जिसका दर्द हम शायद सहन कर सके । &lt;br /&gt;मैं इतना अवश्य कहुंगा अपने नौजवान दोस्तों से कि हम बदलेंगे इसकी तख्दीर क्योंकि हर व्यक्‍ति बदलना चाहता है, और एक बार हम अपनी ताकत का आकलन कर ले तो हर चीज बदल सकती है, क्योंकि - &lt;br /&gt;&lt;blockquote&gt;सारी शक्‍तियाँ हम मे ही समाहित है,&lt;br /&gt;और हम कुछ भी कर सकते है, कुछ भी&lt;br /&gt;अगर हम अपनी कमजोरियों को भूलाकर &lt;br /&gt;एक नई चेतना के साथ एक नये जोश&lt;br /&gt;के साथ शुरूआत करे तो- &lt;br /&gt;&lt;/blockquote&gt;अगर वास्तव में हम इसे रोकना चाहते है, तो हमें अपनी सोच को बदलना होगा। हमें खुद को बदलना होगा, और सच्चे मन से अपने-आप के प्रति वफादार होना पड़ेगा । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;लगे इस देश की ही अर्थ मेरे धर्म विधा धन, &lt;br /&gt;करू मैं प्राण तक अर्पण यही प्रण सत्य है, ठाना ।&lt;br /&gt;नहीं कुछ गैर मुमकिन है, जो चाहो दिल से तुम,&lt;br /&gt;उठा लो देश हाथों पर न समझो अपना बेगाना ॥ &lt;/b&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जय हिन्द&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;- मुकेश कुमार पाण्डेय&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3617770739116937767-184877717476688268?l=mukeshgkp.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/feeds/184877717476688268/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2009/11/2611.html#comment-form' title='7 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/184877717476688268'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/184877717476688268'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2009/11/2611.html' title='देश का दुर्भाग्य (26/11)'/><author><name>mukesh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13668566544256037971</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/-wI9zXReltOU/TbKZvak746I/AAAAAAAAAQQ/yyW68uqMV8E/s220/asd.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/SxDRjL4WvFI/AAAAAAAAAIY/xcKEJXZcH6g/s72-c/Image0013.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>7</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3617770739116937767.post-7492585631327534155</id><published>2009-11-10T03:52:00.000-08:00</published><updated>2009-11-10T04:16:50.989-08:00</updated><title type='text'>वनदे मातरम्</title><content type='html'>&lt;object width="425" height="344"&gt;&lt;param name="movie" value="http://www.youtube.com/v/8ghjFR_SBFk&amp;hl=en&amp;fs=1&amp;"&gt;&lt;/param&gt;&lt;param name="allowFullScreen" value="true"&gt;&lt;/param&gt;&lt;param name="allowscriptaccess" value="always"&gt;&lt;/param&gt;&lt;embed src="http://www.youtube.com/v/8ghjFR_SBFk&amp;hl=en&amp;fs=1&amp;" type="application/x-shockwave-flash" allowscriptaccess="always" allowfullscreen="true" width="425" height="344"&gt;&lt;/embed&gt;&lt;/object&gt;&lt;br /&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br /&gt;सौ साल पहले&amp;nbsp; श्री बंकिम चन्द्र चटर्जी ने इस गीत की रचना की थी। स्वतन्त्रता संग्राम के समय यह गीत क्रान्तिकारियों और देशवासियों मे जोश भरने का जरिया था। आज फिर देशवासियों मे जोश भरने का समय आ गया है। सभी देशभक्त मुसलमानों भाइयों से भी अपील है फर्जी इमामों के ऊल जुलूल फतवों को दर किनार कर वन्दे मातरम गाएं, आखिर वतन हम सभी का है। मादरे वतन से प्यार के इज़हार के लिए किसी फतवे की क्या जरुरत? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मेरा मानना है किः&lt;br /&gt;किसी को वनदे मातरम् गाने के लिए मजबूर नही करना चाहिए – और दूसरी बात जो सच्चा हिनदुस्तानी है वोह ज़बरदस्ती नही बलकि दिल से वनदे मातरम् गाता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;इतिहास:&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;वन्दे मातरम्‌ गीत आनन्दमठ में 1882 में आया लेकिन उसको एक एकीकृत करने वाले गीत के रूप में देखने से सबसे पहले इंकार 1923 में काकीनाड कांग्रेस अधिवेशन में तत्कालीन कांग्रेसाध्यक्ष मौलाना अहमद अली ने किया जब उन्होंने हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के हिमालय पं. विष्णु दिगम्बर पलुस्कर को वन्दे मातरम्‌ गाने के बीच में टोका। लेकिन पं. पलुस्कर ने बीच में रुकर कर इस महान गीत का अपमान नहीं होने दिया, पं- पलुस्कर पूरा गाना गाकर ही रुके।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सवाल यह है कि इतने वषो तक क्यों वन्दे मातरम्‌ गैर इस्लामी नह था? क्यों खिलाफत आंदोलन के अधिवेशनों की शुरुआत वन्दे मातरम्‌ से होती थी और ये अहमद अली, शौकत अली, जफर अली जैसे वरिष्ठ मुस्लिम नेता इसके सम्मान में उठकर खड़े होते थे। बेरिस्टर जिन्ना पहले तो इसके सम्मान में खडे न होने वालों को फटकार लगाते थे। रफीक जकारिया ने हाल में लिखे अपने निबन्ध में इस बात की ओर इशारा किया है। उनके अनुसार मुस्लिमों द्वारा वन्दे मातरम्‌ के गायन पर विवाद निरर्थक है। यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान काँग्रेस के सभी मुस्लिम नेताओं द्वारा गाया जाता था। जो मुस्लिम इसे गाना नहीं चाहते, न गाए लेकिन गीत के सम्मान में उठकर तो खड़े हो जाए क्योंकि इसका एक संघर्ष का इतिहास रहा है और यह संविधान में राष्ट्रगान घोषित किया गया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बंगाल के विभाजन के समय हिन्दू और मुसलमान दोनों ही इसके पूरा गाते थे, न कि प्रथम दो छंदों को। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के अधिवेशन में इसका पूर्ण- असंक्षिप्त वर्शन गया गया था। इसके प्रथम स्टेज परफॉर्मर और कम्पोजर स्वयं रवींद्रनाथ टैगोर थे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;1901 के कांग्रेस अधिवेशन में फिर इसे गाया गया। इस बार दक्षणरंजन सेन इसके कम्पोजर थे। इसके बाद कांग्रेस अधिवेशन वन्दे मातरम्‌ से शुरू करने की एक प्रथा चल पडी। 7 अगस्त 1905 को बंग-भंग का विरोध करने जुटी भीड़ के बीच किसी ने कहा : वन्दे मातरम्‌ और चमत्कार घट गया। सहस्रों कंठों ने समवेत स्वर में इसे दोहराया तो पूरा आसमान वंदे मातरम के घोष से गूंज उठा। इस तरह अचानक ही वन्दे मातरम्‌ और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को उसका प्रयाण-गीत मिल गया। अरविन्द घोष ने इस अवसर का बडा रोमांचक चित्र खींचा है। 1906 में अंग्रेज सरकार ने वन्दे मातरम्‌ को किसी अधिवेशन, जुलूस या सार्वजनिक स्थल पर गाने से प्रतिबंधित कर दिया गया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रसिद्ध नेता सुरेंद्रनाथ बनर्जी और अमृत बाजार पत्रिका के सम्पादक मोतीलाल घोष ने बारीसाल में एकत्र हुए युवा कांग्रेस अधिवेशन के प्रतिनिधियों से चर्चा की। 14 अप्रैल 1906 को अंग्रेज सरकार के प्रतिबंधात्मक आदेशों की अवज्ञा करके एक पूरा जुलूस वन्दे मातरम्‌ के बैज लगाए हुए निकाला गया और पुलिस ने भयंकर लाठी चार्ज कर वंदे मातरम के इन दीवानों पर हमला कर दिया। मोतीलाल घोष और सुरेंद्र नाथ बनर्जी जैसे लोग रक्त रजित होकर सड़को पर गिर पड़े, उनके साथ सैकड़ों लोगों ने पुलिस की लाठियाँ खाई और लाठियाँ खाते खाते वंदे मातरम् का घोष करते रहे।।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अगले दिन अधिवेशन फिर वन्दे मातरम्‌ गीत से शुरू हुआ। 6 अगस्त 1906 को अरविन्द कलकत्ता आ गए और वन्दे मातरम्‌ के नाम से एक अंग्रेजी दैनिक ही निकालना शुरू किया। सिस्टर निवेदिता ने प्रतिबंध के बावजूद निवेदिता गर्ल्स स्कूलों में वन्दे मातरम्‌ को दैनिक प्रार्थनाओं में शामिल किया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेकिन नूरानी अकेले नहीं हैं जिनको देवी या माता जैसे शब्द भी सांप्रदायिक लगते हैं, 13 मार्च 2003 को कर्नाटक के प्राथमिक एवं सेकेण्डरी शिक्षा के तत्कालीन राज्य मंत्री बी-के-चंद्रशेखर ने ‘प्रकृति‘ शब्द के साथ ‘देवी लगाने को ‘‘हिन्दू एवं साम्दायिक मानकर एक सदस्य के भाषण पर आपत्ति की थी। तब उस आहत सदस्य ने पूछा था कि क्या ‘भारत माता, ‘कन्नड़ भुवनेश्वरी और ‘कन्नड़ अम्बे जैसे शब्द भी साम्दायिक और हिन्दू हैं?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;1905 में गाँधीजी ने लिखा- आज लाखों लोग एक बात के लिए एकत्र होकर वन्दे मातरम्‌ गाते हैं। मेरे विचार से इसने हमारे राष्ट्रीय गीत का दर्जा हासिल कर लिया है। मुझे यह पवित्र, भक्तिपरक और भावनात्मक गीत लगता है। कई अन्य राष्ट्रगीतों के विपरीत यह किसी अन्य राष्ट्र-राज्य की नकारात्मकताओं के बारे में शोर-शराबा नह करता। 1936 में गाँधीजी ने लिखा - ‘‘ कवि ने हमारी मातृभूमि के लिए जो अनके सार्थक विशेषण प्रयुक्त किए हैं, वे एकदम अनुकूल हैं, इनका कोई सानी नहीं है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम इन विशेषणों को यथार्थ में बदलें। इसका स्रोत कुछ भी हो, कैसे भी और कभी भी इसका सृजन हुआ हो, यह बंगाल के विभाजन के दौरान हिन्दुओं और मुसलमानों की सबसे शक्तिशाली रणभेरी थी। एक बच्चे के रूप में जब मुझे आनन्दमठ के बारे में कुछ नहीं मालूम था और न इसके अमर लेखक बंकिम के बारे में, तब भी वन्दे मातरम्‌ मेरे ह्रदय पर छा गया। जब मैंने इसे पहली बार सुना, गाया, इसने मुझे रोमांचित कर दिया। मैं इसमें शुद्धतम राष्ट्रीय भावना देखता। मुझे कभी ख्याल नह आया कि हिन्दू गीत है या सिर्फ हिन्दुओं के लिए रचा गया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;देश के बाहर 1907 में जर्मनी के स्टुटगार्ट में अंतर्राष्टीय सोशलिस्ट कांग्रेस का अधिवेशन शुरू होने का था जिसमें पं- श्यामजी वर्मा, मैडम कामा, विनायक सावरकर आदि भाग ले रहे थे। भारत की स्वतंत्रता पर संकल्प पारित करने के लिए उठ मैडम कामा ने भाषण शुरू किया, आधुनिक भारत के पहले राष्ट्रीय झण्डे को फहराकर। इस झण्डे के मध्य में देवनागरी में अंकित था वंदे मातरम्‌। 1906 से यह गीत भारतीयों की एकता की आवाज बन गया। मंत्र की विशेषता होती है- उसकी अखण्डता यानी इंटीग्रिटी। मंत्र अपनी संपूर्णता में ही सुनने मात्र से से भाव पैदा करता है। जब&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;1906 से 1911 तक यह वंदे मातरम्‌ गीत पूरा गाया जाता था तो इस मंत्र में यह ताकत थी कि बंगाल का विभाजन ब्रितानी हुकूमत को वापस लेना पडा, लेकिन, 1947 तक जबकि इस मंत्र गीत को खण्डित करने पर तथाकथित ‘राजनीतिक सहमति बन गई तब तक भारत भी इतना कमजोर हो गया कि अपना खण्डन नहीं रोक सका यदि इस गीत मंत्र के टुकड़े पहले हुए तो उसकी परिणति देश के टुकडे होने में हुई।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मदनलाल ढींगरा, फुल्ल चाकी, खुदीराम बोस, सूर्यसेन, रामप्रसाद बिस्मिल और अन्य बहुत से क्रांतिकारियों ने वंदे मातरम कही कर फासी के फंदे को चूमा। भगत सिंह अपने पिता को पत्र वंदे मातरम्‌ से अभिवादन कर लिखते थे। सुभाषचं बोस की आजाद हिन्द फौज ने इस गीत को अंगीकार किया और सिंगापुर रेडियो स्टेशन से इसका सारण होता था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;1938 में स्वयं नेहरूजी ने लिखा-‘ तीस साल से ज्यादा समय से यह गीत भारतीय राष्ट्रवाद से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा रहा है। ‘ऐसे जन गीत टेलर मेड नहीं होते और न ही वे लोगों के दिमाग पर थोपे जा सकते हैं। वे स्वयं अपनी ऊँचाईया हासिल करते हैं। यह बात अलग है कि रविन्नाथ टेगौर, पं. पलुस्कर, दक्षिणरंजन सेन, दिलीप कुमार राय, पं- ओंकारनाथ ठाकुर, केशवराव भोले, विष्णुपंथ पागनिस, मास्टर कृष्णावराव, वीडी अंभाईकर, तिमिर बरन भाचार्य, हेमंत कुमार, एम एस सुब्बा लक्ष्मी, लता मंगेशकर आदि ने इसे अलग अलग रागों, काफी मिश्र खंभावती, बिलावल, बागेश्वरी, झिंझौटी, कर्नाटक शैली आदि रागों में गाकर इसे हर तरह से समृध्द किया है। बडी भीड भी इसे गा सकती है, यह मास्टर कृष्णाराव ने पुणे में पचास हजार लोगों से इस गीत को गवाया और सभी ने एक स्वर में बगैर किसी गलती के इसको गाकर इस गीत की सरलता को सिध्द किया।फिर उन्होंने पुलिसवालों के साथ इसे मार्च सांग बनाकर दिखाया। विदेशी बैण्डों पर बजाने लायक सिद्ध करने के लिए उन्होंने ब्रिटिश नेवल बैण्ड चीफ स्टेनलेबिल्स की मदद से इसका संगीत तैयार करवाया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;26 अक्टूबर 1937 को पं- जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में कलकत्ता में कांग्रेस की कार्यसमिति ने इस विषय पर एक प्रस्ताव स्वीकृत किया। इसके अनुसार ‘‘ यह गीत और इसके शब्द विशेषत: बंगाल में और सामान्यत: सारे देश में ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ राष्ट्रीयय तिरोध के प्रतीक बन गए। ‘वन्दे मातरम्‌ ये शब्द शक्ति का ऐसा पस्त्रोत बन गए जिसने हमारी जनता को प्रेरित किया और ऐसे अभिवादन हो गए जो राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम की हमें हमेशा याद दिलाता रहेगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गीत के प्रथम दो छंद सुकोमल भाषा में मातृभूमि और उसके उपहारों की प्रचुरता के बारे में देश में बताते हैं। उनमें ऐसा कुछ भी नहीं है जिस पर धार्मिक या किसी अन्य दृष्टि से आपत्ति उठाई जाए।&lt;br /&gt;जय हिन्द।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3617770739116937767-7492585631327534155?l=mukeshgkp.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/feeds/7492585631327534155/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2009/11/vande-mataram.html#comment-form' title='6 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/7492585631327534155'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/7492585631327534155'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2009/11/vande-mataram.html' title='वनदे मातरम्'/><author><name>mukesh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13668566544256037971</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/-wI9zXReltOU/TbKZvak746I/AAAAAAAAAQQ/yyW68uqMV8E/s220/asd.jpg'/></author><thr:total>6</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3617770739116937767.post-2093201482225771507</id><published>2009-10-04T23:28:00.000-07:00</published><updated>2009-10-27T06:03:41.206-07:00</updated><title type='text'>हमारा संकल्प</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/SubvmJb9ZTI/AAAAAAAAAIA/gIz0zw-49SI/s1600-h/IMG0205A.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://2.bp.blogspot.com/_m445AIKhTT0/SubvmJb9ZTI/AAAAAAAAAIA/gIz0zw-49SI/s320/IMG0205A.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हमारा संकल्प (लक्ष्य) जो हिमालय की ऊंचाइयों से भी ऊँचा और बुलंद है, जहां हमें आज से काफी पहले पहुँच जाना था, परन्तु हम अपनी मनोकामनाओं की वजह से उसे पाने में असफल रहे । जिसका सारा श्रेय हमी को जाता है, और सिर्फ हमी को । जिसका परिणाम यह है कि हमारे पास हजारों मुश्किलें वही बनी हुई हैं । हम उन मुश्किलों में कमी लाने के बजाय और बढ़ा चुके हैं, तो प्रश्न यह उठता है, कि क्या हम अपने अतीत को भुलाकर एक नये भविष्य की नीव रखें, या उन घटनाओं से सबक लें जो अतीत में घटित हुईं । मेरा मानना है, कि नहीं हम एक नये भविष्य की बुनियाद तो जरूर रखेंगे, मगर अतीत की घटनाओं से जो परिणाम निकले, उसको भी दिमाग में रखेंगे । हम आज फिर वो गलतियां दोहराने की कोशिश कदापि नही करेंगे जो पहले हुईं । हम फिर से जयचंद को अवसर ही नही देगें, जो हमारी बर्बादी, हमारी संस्कृति की बर्बादी का कारण बन सके । हम ऐसे लोगों को भी अवसर नहीं देंगे, जो आजाद रहने पर सत्ता की बागडोर संभालते हैं । और गुलाम होने पर उनके सहकर्मी बन जाते हैं । हमें और इस देश को, इस समाज को ऐसे महानायकों की जरूरत है, ऐसे युवाओं की जरूरत है जो, अनुकूल और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य के साथ, देश व समाज के विकास के प्रति स्थिर&amp;nbsp; व क्रियाशील रह सकें । हम आज एक नई दुनिया (राष्ट्र) की बुनियाद रखेंगे, जिसमें नींव से लेकर गुम्बद तक की हर ईंट, हर वो कण कर्तव्यनिष्ठ, कर्मठी व ईमानदार होगा । यही होगा “हमारा संकल्प” राष्ट्र उत्थान का सामाजिक विकास व समन्वय का । &lt;br /&gt;&amp;nbsp; हमारा संकल्प यह तय करेगा की, इसका नेतृत्व कौन करेगा ? कौन इसके सपनों&amp;nbsp; को मंजिलों में तब्दील करेगा । हमारा संकल्प तब तक पूरा नहीं होगा जब तक इस समाज से, इस देश से उन लोगों का सफाया नहीं हो जाता । जो सत्ता लौलुपता की वजह से हमें तथा इस समाज व देश को बर्बाद करते जा रहे हैं । हमें रोकना है, उन सारे नेताओं को जो देश की सुरक्षा, व्यवस्था के बजाय अपनी सुरक्षा को ज्यादा महत्व देते हैं । जो हमारे आपके सहनशीलता व सांस्कृतिक होने का गलत इस्तेमाल&amp;nbsp; करते हैं । हमारा संकल्प तब तक पूरा नहीं हो सकता, जब तक हम और आप उन लोगों को अवसर देना बन्द नहीं करते । हम सब कुछ जानते हुए भी शांत बने हुए हैं आज हमारे द्वारा चुने गए राजनेता हमें ही पशु ठहराते हैं, हमारी सहनशीलता को हमारी कायरता समझते हैं । हमारे आपके आमदनी की कटौती से अपनी सुविधाओं के लिए खर्च करते हैं । और हम उसे चुपचाप सहन कर जाते हैं, अगर नहीं सह सके तो दो चार गाली देकर दिल को तसल्ली दिला लेते हैं । अगर हमें अपना संकल्प पूरा करना है, तो हमें अपने आप में बदलाव लाना ही होगा । हमें अपनी जिम्मेदारियों को निभाना ही होगा । किसी महान विचारक ने इस प्रजातंत्र की व्याख्या इस प्रकार से की है -&lt;br /&gt;प्रजातंत्र का अर्थ है, - हजार, लाखों, विद्वानों का नेतृत्व एक मूर्ख के हाथ में होना, जो आज सिद्ध होती दिख रही है । आज हम सारे नौजवान दोस्त जो, किसी न किसी कार्य में निपुण हैं, हम राजनीति, कानून, विज्ञान, सूचना, प्रौद्योगिकी, साहित्य बल, साहस में कुशल होते हुए भी, उन सारे लालची मुर्खों के नेतृत्व में हैं ।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;अगर हमारा नेता मूर्ख है, तो इसका अर्थ यह है, की हम सारे लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं, क्योंकि&amp;nbsp; उसे अवसर हमने दिया है- एक छोटे उदाहरण से ये सारी बातें और भी स्पष्ट हो जाती हैं, वो है चुनाव । &lt;br /&gt;&amp;nbsp;चुनाव चाहे सांसद का हो, विधायक का हो या ग्राम प्रधान का ही क्यों न हो, हम उसमें बिल्कुल दिलचस्पी नहीं रखते, हम अर्थात वो सारे लोग, जो चाहे नौजवान हो चाहे बुजुर्ग । जो कैरियर, सेवा, शिक्षा या किसी अन्य कारण की वजह से अपने-अपने क्षेत्रों से बाहर रहते हैं, उनके लिये यह चुनाव कोई मायने नहीं रखता, उनके लिए मायने रखता पर्व-त्यौहार जिसमें वो अपने-आप को उन अवसरों भर पर मनाते हैं । वो वोट को उन पर्व त्यौहारों से ज्यादा महत्व नहीं देते हैं । फिर परिणाम क्या होगा, वही लोग अवसर पायेंगे जो देश को खरीद-फरोख्त से लेकर इसके दामन में दाग लगायेंगे । &lt;br /&gt;&amp;nbsp; अगर हमें अपने इस संकल्प को पूरा करना है, तो हमें चेतना लानी होगी उन सभी लोगों में । हमने कुछ दिन पहले अखबार में पढ़ा था, कि लालू यादव से प्रेस कान्फ्रेंस में पूछा गया कि आपके कारनामे अखबार में छपे हैं । इस पर आपके वोटरों पर क्या प्रभाव पड़ेगा ? तो उन्होंने जवाब में कहा था कि- हमारी वोटर तो वो जनता है, जो अखबार ही नहीं पढ़ती । आप स्वयं इसका आकलन कर सकते हैं, कि ऐसे राजनेता जनता को किस रूप में देखना चाहते हैं । ऐसे राजनेता हमें तथा उन जनता को शिक्षित भी नहीं देखना चाहते तो वो देश, राज्य व समाज का क्या विकास कर सकते है ः- &lt;br /&gt;&amp;nbsp;ऐसे हमारे और आपके बीच हजारों घटनाओं के उदाहरण अवश्य होगें । &lt;br /&gt;&amp;nbsp; हमारी संकल्पना एक ऐसे निश्‍चय के रूप में होना चाहिये जिसमें हम किसी के साथ किसी भी प्रकार का समझौता न करें । हम अपने और गैर में फर्क न महसूस कर सकें क्योंकि आज का जो समय है, वह फिर नहीं आने वाला है । &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;span style="color: blue;"&gt;जीने के लिये मौत से सौदा नहीं करते,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; नजदीकियों का भ्रम न हो, लग जायें पालने,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; ये सोचकर लो गैर से पर्दा नहीं करते ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; जाते हुए समय ने यह कहकर विदा ली,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; लौटेंगे इसी मोड़ पर वादा नहीं करते ॥&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;फिर भी हम आज जहां हैं, जिस स्थिति में हैं, वह अधिक संतोषजनक तो नहीं, परन्तु हम इसे कुछ समय के लिये संतोषजनक अवश्य समझ सकते हैं, क्योंकि हमारे ही देश के कुछ भागों में इसकी शुरूआत तो हो चुकी है, - &lt;br /&gt;&amp;nbsp;कोई भी देश, कोई भी समाज बेहतर नहीं होता है । उसे बेहतर बनाया जाता है । और बेहतर होते हैं, वहां के लोग । जो उसे बेहतर बनाते हैं । आज दुनिया में काफी बदलाव आ चुका है । हमें बदलाव के साथ अपने समाज को, देश को नयी दिशा देनी होगी , एक नई क्रांति लानी होगी जिससे देश को इन परिस्थितियों से उबार सकें । और विश्‍व पटल पर वर्चस्व स्थापित करें ।&amp;nbsp; &lt;br /&gt;&amp;nbsp; इसको पाने के लिए हमें भले ही शांति ही भंग क्यों न करनी पड़े । हमें बुद्ध और गाँधी के वचनों को झुठलाना ही क्यों न पड़े । आज जरूरत है, देश को हमारी, और हम उम्मीद करते हैं, कि आप और हम एकजुट होकर तैयार हैं, इसके संकल्प को पूरा करने के लिए । अगर ऐसा हुआ तो, मैं उम्मीद करता हूँ की जो हमारे देश से वो सारी समस्यायें अवश्य दूर हो जायेंगी, चाहे वह भ्रष्टाचार का हो या आतंकवाद का, अशिक्षा का हो या भुखमरी का । वास्तव में देखा जाय तो सारी समस्याओं की जड़ है, कि कौन शुरूआत करे ? सबके अंदर एक उबाल है, जैसे लगता है कि एक बीमारी से सब पीड़ित हैं । सबकी स्थिति ठीक वैसे ही है -&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;span style="color: orange;"&gt;“सीने में जलन आँखों में तूफान सा क्यों है,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: orange;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यूं है?&lt;/span&gt; ”&lt;br /&gt;जरूरत है, मार्गदर्शक की, कौन पहले उठे कौन दिशा निर्देश दे, कि हमें क्या करना चाहिए ? &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; अगर हमें अपना संकल्प पूरा करना है तो हम सबको आगे आना ही होगा । नींव की ईंट तो बननी ही पड़ेगी । क्योंकि बिना उस ईंट की इमारत मैं उम्मीद तो नहीं हो सकती । मैं उम्मीद करता हूँ, आप सभी से की आपमें से हर व्यक्‍ति जरूर तैयार होगा नींव की ईंट बनने के लिए । क्योंकि पूजन तो उसी ईंट की होता है, जो सबसे पहले इमारत में लगती है । बलिदान तो उसी का महत्वपूर्ण होता है । यह तो अलग ही बात है, कि उस पर नकासी नहीं होती उस पर सजावटें नहीं होतीं । &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; मैं उम्मीद करता हूँ कि हमारा संकल्प एक ऐसा स्वप्न है, जो रात में सोने के वक्‍त नहीं देखा गया, बल्कि वो स्वप्न है जिसकी वजह से हम रात को सो नहीं पाते हैं । हमारा संकल्प एक ऐसी उम्मीद है, जिसको हमें हर कीमत पर सत्यार्थ करना ही होगा । इसको पाने के लिये हमें साहस, धैर्य, बलिदान व त्याग की जरुरत है । हमें अपने अन्दर से कायरता, द्वेष को नष्ट करना पड़ेगा । ” हमें अपने आप को खुद बदलना होगा, क्योंकि हम किसी दूसरे महापुरूष का अनुसरण तो दूर उसमें दिलचस्पी भी नहीं रखते । अगर ऐसा नहीं होता तो, गीता, कुरान पढ़कर महात्मा बुद्ध, गाँधी का अनुसरण करके आज हम कहाँ होते । मगर हम सिर्फ समस्याओं को समाप्त करने के बजाय दूसरे को जिम्मेदारी कहकर टालते चले जाते हैं । जिसका परिणाम हमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों ही रूपों में कहीं न कहीं अवश्य दिखता है । आज जरूरत है, हर व्यक्‍ति को कि वो समस्याओं से लड़े वह खुद ही गाँधी भी है, सुभाष भी है, और स्वयं गीता और कुरान का प्रतिनिधि भी, क्योंकि जब तक हम अपनी शक्‍तियों को अपने विद्वता को खुद नहीं समझेंगे, उस पर विश्‍वास नहीं करेंगे तब तक हम&amp;nbsp; किसी समस्या का समाधान क्या किसी छोटे से कार्य को भी नहीं कर सकते ! स्वयं स्वामी जी ने कहा है,&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;b&gt; &lt;span style="color: #cc0000;"&gt;``you can not believe God,&lt;/span&gt;&lt;br style="color: #cc0000;" /&gt;&lt;span style="color: #cc0000;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; until you believe in yourself ''&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तो जरूरत है । अपने आत्मविश्‍वास को जगाने की और लोगों में एक नयी-चेतना लाने की, जिससे हर व्यक्‍ति अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए, अपने कर्तव्य का पालन करे । तो वह दिन दूर नहीं होगा जिस दिन हमारा संकल्प पूरा होगा हमारी मंजिल हमें मिलेगी । &lt;br /&gt;&amp;nbsp;जब एक छोटे से कार्य में परेशानियाँ आ सकती हैं, तो हम तो बहुत बड़े ही अभियान की शुरूआत करने जा रहे हैं तो, हमें परेशानियां तो अवश्य मिलेंगी । मगर उससे हमें विचलित नहीं होना चाहिए । और अन्त में मैं सिर्फ इतना ही कहूँगा - &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;span style="color: #660000;"&gt;&amp;nbsp; मुश्किलें दिल के इरादे आजमाती हैं,&lt;/span&gt;&lt;br style="color: #660000;" /&gt;&lt;span style="color: #660000;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; स्वप्न के वादे निगाहों से हटाती हैं,&lt;/span&gt;&lt;br style="color: #660000;" /&gt;&lt;span style="color: #660000;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; हैं, सलामत हार , गिर कर ओ मुसाफिर&lt;/span&gt;&lt;br style="color: #660000;" /&gt;&lt;span style="color: #660000;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; ठोकरें इंसान को चलना सिखाती हैं । &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3617770739116937767-2093201482225771507?l=mukeshgkp.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/feeds/2093201482225771507/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2009/10/blog-post.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' 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width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3617770739116937767.post-8083241264594337608</id><published>2009-09-07T22:07:00.000-07:00</published><updated>2010-02-19T08:00:04.635-08:00</updated><title type='text'>मैं और मेरा अतीत</title><content type='html'>&lt;span style="font-weight: bold; color: rgb(51, 51, 0);"&gt;“एकोअहम द्वितीयो नास्ति”&lt;/span&gt;- अर्थात सिर्फ मैं और कुछ भी नहीं, मुझसे ही शुरू होती है और जो मुझ पर चलती रहती है । &lt;br /&gt; &lt;span style="font-weight:bold;"&gt;“मैं जो एक सोच है, एक संस्कार है, और एक देश है।&lt;/span&gt; &lt;br/&gt;जिसने अतीत में कुछ भविष्य की इमारतों की बुनियाद रखी थी । क्या मै अपने आज में उन सपनों को पाता हूँ । जो हमने अतीत में संजोये थे । मैं जो दुनिया को प्रेम और सौहार्द से एक परिवार तथा उसके सदस्य होने का बीड़ा उठाया था ! क्या साकार कर सका । क्या हुए वो सपने, क्या हमने शांति और प्रेम के पुजारियों का बलिदान यूं ही व्यर्थ गंवा दिया ।&lt;br /&gt; आज मैं इन सारे सवालों का उत्तर जब दूंढ़ता हूँ तो अपने आप को बहुत शर्मिंदा समझता हूँ, क्योंकि वो सारे अतीत नहीं हमारे भविष्य की नींव से इमारत बन सके नहीं, दुनिया में शांति स्थापित हो सकी । मिला तो सिर्फ, द्वेष, ईर्ष्या, कलह और सिर्फ अपना विकास करने की होड़, जिससे न तो अपना ही विकास हो सका ना ही समाज या देश का ।&lt;br /&gt; बहुत महापुरूष कहते हैं कि आप अगर अपना विकास करे अपने आप को बदलें तो दुनिया बदल सकती है, मगर मे उनके अनुभवों से शत प्रतिशत सहमत नहीं हूँ । और न ही आपको भी होना चाहिये । जरूरत है मैं को बदलने की मैं में शांति स्थापित करने की, जो मैं एक व्यक्‍ति नहीं, एक समाज का नेता है जो नायक है उस देश का, उस संसार का जिसमें आधे से अधिक की आबादी अपने अस्तित्व तथा अपने होने और न होने की परिभाषा तक नहीं समझती । मैंने अपने अतीत में रावण से इस संसार को मुक्‍त कराकर शांति और प्रेम की स्थापना की तो कभी चन्द्रगुप्त बनकर सिकन्दर जैसे महत्वाकांक्षी महापुरूष के हृदय में शांति स्थापित किया ।  काफी नरसंहार के बाद अशोक के हृदय में शांति, प्रेम, शरणागत कराया ।&lt;br /&gt; मगर आज मैं चाहते हुए भी इस संसार को प्रेम और शांति का पाठ नहीं पढ़ा सकता, क्योंकि यह प्रकृति की विलक्षणता ही तो है, कि बिना बलिदान के शांति और प्रेम स्थापित नहीं किया जा सकता ।  मैं बार-बार दूसरों के द्वारा सोमनाथ मंदिर के रूप में लूटा गया तो कभी अपने ही सपूतों के द्वारा बाँटा भी गया । मैं कभी भारत से हिन्दुस्तान, पाकिस्तान बना । मैं जो अतीत था, आज उसकी केवल परछाई रह गई है । आज के मैं में मेरा मानना है कि मैं के सपने बार-बार यूँ ही बनते और टूटते रहेंगे । जब तक की इसको साकार करने की शपथ हम आज और अभी नहीं लेते ।&lt;br /&gt;हमारे अतीत का दुर्भाग्य भी उसी दिन से शुरू हुआ, जिस दिन से हमने अपने नजरिये से अपना, पराया, धर्मवाद, जातिवाद, क्षेत्रवाद के आधार पर अलग समझा । आखिर कब तक होती रहेंगी ऐसी घटनायें, कब तक हम इसे दुर्भाग्य कह कर टालते रहेंगे । कब तक अपने अमानवीय, व्यवहारों से अपने अतीत को जिम्मेदार ठहराते रहेंगे । आज हम जिसे गुनाहगार समझते या ठहराते हैं, उसके जिम्मेदार भी तो हमी हैं । मैं मौन था । उस समय भी, और आज भी रहूँगा । मुझे दुख उतना ही महसूस होता है । जब आप किसी सफलता पर उत्साहित होते या जश्न मनाते हैं। तो इसका मतलब यह तो नहीं कि मैं आपसे आपकी सफलता से द्वेष करता हूँ । हाँ मुझे द्वेष है, आपके तरीके पर आपकी सोच पर क्योंकि उसके भविष्य में भी अंकुर फूटने वाले हैं, जो आज मेरे सामने है । वह कल आपसे वही प्रश्न करने वाला है, जो आज मैं जबाब ढूंढ़ नहीं सका हूँ । या जिसका जबाव मेरे पास नहीं है ।&lt;br /&gt; आज मेरे सामने शब्दों की परिभाषायें और मतलब बदल गया है । क्योंकि ऐसा न होता तो, वो शब्द, वो गीत बनते ही नहीं जिसका अस्तित्व आज भी हमारे आपके बीच है, एक छोटा सा उदाहरण आपके समक्ष है, धर्म का जो सदियों पुराना है, जिसे सिर्फ इस लिए बनाया गया जो पूरे विश्‍व को एक प्रेम के धागे में बाँध सके । &lt;br /&gt;           एक ऐसा शब्द जिसमें पूरा विश्‍व एक परिवार बन सके,&lt;br /&gt;           न कि हिन्द राष्ट्र या मुसलमान राष्ट्र सिख, या कैथोलिक राष्ट्र ही बने ।&lt;br /&gt; जब धर्म एक शब्द था,  तो उसके इतने सारे प्रारूप कैसे हुए, कैसे हुआ अलग-अलग रूप इसका आज इसका अर्थ बिल्कुल ही बदल चुका है, क्योंकि आज धर्म लोगों को जोड़ने के बजाय एक-दूसरे से मतभेद रखते हैं । एक-दूसरे को सताते हैं । कहीं गोधरा में मुस्लिम जलते हैं, तो वहीं कश्मीर में हिन्दू प्रताड़ित किये जाते हैं । -&lt;br /&gt; ये सारे मुद्दे सिर्फ और सिर्फ कलह पैदा कर सकते हैं, शांति और प्रेम नहीं-&lt;br /&gt; तो आइए क्यों न हम एक धर्म बनायें जो कि मानव धर्म हो, जिसमें मानव तो क्या कोई भी जीव जिसे दुख होता है, जो अशांति महसूस करता हो उसमें शांति की स्थापना करे ।&lt;br /&gt; आज मैं के सामने जो सबसे बड़ा प्रश्न है, वो है, “मैं की बागडोर किसके हाथ में हो, कौन उसका सारथी बने जो इसे इन सारे प्रश्नों का उत्तर उसी के ही कर्मक्षेत्र, कुरूक्षेत्र में दे सके । जो मन की गति से भी तेज दौड़ सके ।&lt;br /&gt; आज यह जो प्रश्न है, वह अब तक हुए सारे युद्ध के कारणों से बड़ा है वह सबसे महत्वपूर्ण इस लिए है, कि इस युद्ध के बाद कोई भी बचने वाला नहीं है । आज उसका प्रतिदंद्वी अन्य नहीं स्वयं ही है, क्योंकि जब आप स्वयं को मार दोगे फिर क्या बचेगा ?&lt;br /&gt; आपको विजय पानी है, स्वयं पर और जीतना भी स्वयं को है, और हराना भी स्वयं को ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; आज मैं जो “हमारा देश” एक महत्वपूर्ण बदलाव के बाद प्रजातांत्रिक देश के रूप में दुनिया में अपने आप को विशेष रूप में स्थापित करना चाहता है, जो फिर से एक बार वही सपना जो साकार करना चाहता है, लेकिन हमलोग इसके उस सपने को हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं । हम अपने आप को उसकी महत्वाकांक्षा को लक्ष्य के रूप में नहीं तब्दील कर रहें हैं, क्योंकि हम उसकी महत्वाकांक्षा का महत्व अपनी आकाक्षांओं से धो देना चाहते हैं ।&lt;br /&gt;         हम उसके लक्ष्य को अपना लक्ष्य नहीं मानते, हम उसके विकास को अपना विकास नहीं मानते, हम अपने निजी विकास व सुख को ज्यादा तवज्जो देते हैं । हम दूसरे के दुखों से दुःखी नहीं होते हैं, उसके सुख से सुखी भी नहीं होते हैं, क्योंकि हम केवल अपना स्वयं अपने ही सुख और दुख का अनुभव करते हैं ।&lt;br /&gt;     अगर हममें से हर व्यक्‍ति अपने आपको बदलते हुए हर एक दूसरे के सुख -दुःख का सहभागी बन सके, तो वही अनुभूति है सच्चे सुख की और दुःख की । वास्तव में  वही मानव है, वही सच्चा राष्ट्रभक्‍त व समाजसेवी हो सकता है क्योंकि-&lt;br /&gt;       “यूं तो हर आँख यहाँ बहुत रोती है,&lt;br /&gt;       हर बूँद मगर अश्क नहीं होती है,&lt;br /&gt;       देखकर रो दे जो जमाने का गम&lt;br /&gt;       उस आँख से गिरा हर अश्क मोती है ।"&lt;br /&gt;अन्त में मैं सिर्फ इतना ही कहूँगा कि आप हम अपने आप को बदलते हुए एक ऐसे समाज की स्थापना करे, एक ऐसे देश का निर्माण करे, एक ऐसा देश का निर्माण करें, जिसमें एक सामन्जस्य स्थापित हो सके । फिर से प्रेम, सौहार्द्र का वर्चस्व रहे, क्योंकि-&lt;br /&gt;      ``A good heart is better than&lt;br /&gt;                all the heads in the world"&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;thanks&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुकेश कुमार पान्डेय&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3617770739116937767-8083241264594337608?l=mukeshgkp.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/feeds/8083241264594337608/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2009/09/blog-post.html#comment-form' title='9 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/8083241264594337608'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/8083241264594337608'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2009/09/blog-post.html' title='मैं और मेरा अतीत'/><author><name>mukesh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13668566544256037971</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/-wI9zXReltOU/TbKZvak746I/AAAAAAAAAQQ/yyW68uqMV8E/s220/asd.jpg'/></author><thr:total>9</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3617770739116937767.post-8661152770692969823</id><published>2009-08-31T22:38:00.001-07:00</published><updated>2009-08-31T22:38:33.794-07:00</updated><title type='text'>राजनीति में युवाओं की भागीदारी</title><content type='html'>राजनीति में युवाओं की भागीदारी&lt;br /&gt;                                             - मुकेश कुमार पाण्डेय&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हमारा देश (भारत) एक बहुत ही बड़ा प्रजातांत्रिक देश है । जिसकी विशालता, हमें उसके राजनीतिक उथल-पुथल से मालूम होता है । हमारे इस देश में बहुत ही अहम विभूतियां पैदा हुई, जिन्होंने अपने विचारों से विश्‍व के राजनीतिक परिदृश्य पर अद्‌भुत छाप छोड़ी । आज भी उनका कद्र देश के बाहर उतना ही है, जितना अपने देश में ।  आज का समय युवाओ के लिये बहुत ही उत्कृष्ठ है । क्योंकि इस समय हमारे देश में जितनी भी राजनीतिक पार्टियां सक्रिय है । उनमें युवाओं की कमी आपको जरूरत महसूस होगी, उनके पास वही मुद्दे, वही विचार, वही सोच आज भी है, जो सन्‌ १९४७ में था । अपितु हम उसे संतोषजनक नहीं कह सकते । जब हमारा देश आजाद हुआ उससे पहले यह अनेक राज्यो, विरासतों में विभाजित था । उस समय भी राजनीतिक परिदृश्य वही थे, जो आज है । वही क्षेत्रवाद, वही जातिवाद, एवं वंशवाद से ओतप्रोत, गंदी राजनीति, जिसकी वजह से हमारी संस्कृति कभी नष्ट हुई तो कभी  विदेशी लुटेरों का सम्राज्य स्थापित हुआ । जिनके आपसी कलह की वजह से ही महाराणाप्रताप जैसे सच्चे देशभक्‍त के समय मे अकबर महान कहलाया । वो क्या था ? प्रश्न हमारे बीच आज भी वही है कि हम उन लोगों को आज भी प्रोत्साहित कर रहे है । जिनमें वंशवाद की राजनीतिक, तो कहीं एक ही देश में उसको धर्म के आधार पर, अलगाव का हवा दिया जा रहा है । हम अगर किसी मंच से किसी एक समुदाय की रक्षा की बात कह दें, तो उसे दूसरे समुदाय के प्रति बगावत करार दिया जाता है । आखिर कब तक होता रहेगा सब -&lt;br /&gt; “ करता नही क्यूँ, दूसरा कुछ बातचीत&lt;br /&gt;देखता हूँ , मैं जिसे वो चुपचाप तेरी महफिल में ।&lt;br /&gt;आखिर कब तक हम अपने ही घरो में मेहमान बनकर रहेंगे ! कब तक !&lt;br /&gt;हम नौजवानों ने ही इसकी संस्कृति को बचाया है । जब-जब समय आया है , तब-कोई न कोई, सुभाष बना, तो कोई भगत सिंह । आज का सही समय आ गया है, अपने-आपको साबित करने का, अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने का । हम पुलिस-चौकी से लेकर, सीमा तक ही नहीं, लोकसत्ता में भी अपनी कौशल निस्वार्थ भाव से कर सकते है । आज के नेता जो सिपाहियों के मरने को भी राजनीतिक  मुद्दा बना देते है । उसे रोकना होगा ! नहीं तो हर सिपाही, हर जवान, अपने कर्तव्य को निभाने से चुक जायेगा । हमारा अपने देश के प्रति ऐसा ही भाव होना चाहिए कि-&lt;br /&gt;  जन्म से आग हूँ, शबनम नहीं,&lt;br /&gt;  इसलिये ताशिर मेरा, नाम नहीं ।&lt;br /&gt;  जग संवर जाये, मेरी कोशिश हों ये,&lt;br /&gt;  हम बिखर जाये , कोई गम नहीं । ।&lt;br /&gt;आज जैसे कुछ राजनीतिक पार्टियां, वंशवाद को युवाओं की पार्टी बतलाती है । इसमें कितनी सच्चाई है? आप इसका स्वयं आकलन कर सकते है कि उन युवाओं में कौन है? ध्यान देने वाली बात है- उनमें कोई भुतपूर्व प्रधानमंत्री के लड़के है, तो कुछ कैबिनेट मंत्री के सुपुत्र है । सोचने वाली बात यह है कि एक आम आदमी ऐसा अवसर क्यों नही पाता है , क्यों नही हम, आप राजनीति का हिस्सा बन पाते है? दूसरों के सुख-दुख को उतना नहीं जान पाते जितना U.S  में पढ़ाई से लौटने के बाद पूरा दिन ऐसो-आराम में रहने वाला व्यक्‍ति चन्द कुछ पल, घंटों, रातों में उनके सुख-दुख को अपना बताने में सफल होता है, और वहीं समाज जिनके सारी परेशानियों से लेकर खुशियों में आप होते हैं । आप उनके प्रिय नहीं बन पाते आप मसीहा नहीं कहलाते । मैं यह कहना चाहता हूँ कि वह आदमी ज्यादा कर्मठी ही या सुविधायुक्‍त एवं अवसरवादी नही है । अवसरवादी तो हम, आप है जो कभी भी अपने कार्यों, अपने लोगों के अलावा सोचा ही नहीं । हम उनके बीच रहकर भी उनके विश्‍वास में खरे नहीं उतरते । जो एक देश के प्रति होना चाहिये जो की समाज के प्रति होना चाहिए । हम पुत्र हैं, पहले भारतमाता के फिर अपनी माँ के जिसने हमें पाला, हम ऋणी है, उसके जिसने हमें बचपन से लेकर अबतक रहने का, खेलने का, काम करने का, यहाँ का होने का उपहार दिया- जरा सोंचे हमने क्या दिया ? बदले मे ं इसे, समय आने पर निराशा ही हाथ लगी - क्योंकि हममें से ही कोई जयचंद्र हुआ तो कोई बी० पी० सिंह, एक ने मुहम्मद गोरी को अवसर दिया तो दूसरे ने जाति के आधार पर देश को बर्बाद किया । वही राजनीति हमारे देश की राजनीति में धूरी की तरह काम कर रहा है । जितनी भी क्षेत्रीय पार्टियां है उनकी राजनीति क्षेत्रवाद, धर्मवाद, से जातिवाद तक सिमट कर रह जाती है । सबसे शर्मनाक बात यह है कि बड़ी पार्टियां इस मामले में कम नहीं है ।&lt;br /&gt;प्रश्न यह नहीं है कि कौन क्या है? उसका उदेश्श्य क्या है? प्रश्न यह है कि हमें उससे मुक्‍ति कैसे मिलेगी, हमारे प्रयास क्या होंगे ? क्योंकि हमें भी सावधान रहना पड़ेगा । मैं विश्‍वास करता हूँ कि हर आदमी उब चुका है ऐसे राजनीतिज्ञों से, और हम युवा भी तैयार है उनका जवाब देने के लिये -तभी-&lt;br /&gt; है लिये हथियार दुश्मन , ताक में बैठा उधर,&lt;br /&gt; और हम तैयार है, सीना लिये अपना इधर ।&lt;br /&gt; खून से खेलेंगे होली, गर वतन मुश्किल में हैं । ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; दिल में तूफानों की टोली, और नसों में इन्कलाब ,&lt;br /&gt; होश दुश्मन के उड़ा देंगे, हमें कोई रोको न आज ।&lt;br /&gt; दूर रह पाये जो हमसे, दम कहाँ मंजिल में है । ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज जरूरत हैं हमारी और हम उम्मीद करते हैं कि आप लोग बदलेंगे , इस समाज को , इस देश को अगर हम प्रयोगों, अनुप्रयोगों से किसी व्यक्‍ति को जीवन देने में सफल होते तो हम नये अनुसंधानों के माध्यम से चाँद, मंगल, पर पहुँच कर वहाँ की परिदृश्य बदल सकते हैं । तो आखिर इस देश की बुराइयों को क्यों नहीं समाप्त कर सकते हैं ।  हमें एक होने की जरूरत हैं महत्वकांक्षी बनने की जरूरत हैं, प्रेम, सौहार्द स्थापित कर सामाजिक समन्वय लाने की जरूरत हैं ।  तो सबसे पहले हमारा एक ही उदेश्श्य हों वो हों - राष्ट्रीय व सामाजिक समन्वय ।  हमें राजनीति नहीं करनी हैं धर्म की, जाति की, क्षेत्र की, हमें राजनीति करनी होगी राष्ट्र उत्थान की । हमें घोषणापत्र जारी करना होगा , देश के सामाजिक संतुलन का, एक दूसरे को जोड़ने का , हमें सोचना होगा पूरे देश की जनता का, न की बहुसंख्यक व अल्पसंख्यक का । क्योंकि शक्‍ति जोड़ने से बनती है तोड़ने से नहीं । हमारा देश एक है और हमेशा एक रहेगा । हम इसे फिर टूकड़ों में नहीं बँटने देंगे । हमारा एक ही लक्ष्य होगा एक ही गीत होगा- “एक सद्विपा बहुधा वन्दति ”  मतलब एक भारत जिसमें सबकुछ समाहित होगा ।&lt;br /&gt;हमें अपनी प्रतिभा का उपयोग दूसरे उत्थान में करना होगा । क्योंकि किसी भी देश की मजबूती उसके राजनीतिक कौशल, निपुणता से होती हैं । हम अपना वर्चस्व विश्‍व पटल पर दर्शा सकते है । मैं आह्वान करता हूँ, उन तमाम नौजवान दोस्तों से जोकि राजनीति में रूचि नहीं रखते हैं जिससे उनको लगता है कि इसमें उनका नुकसान नहीं है तो यह केवल उनका एक भ्रम है । क्योंकि देश की सारी घटना चक्र वहीं से शुरू और वहीं खत्म होती है । मैं चाहुँगा कि आप सभी अपनी जिम्मेदारियों को समझें और एक ऐसा माहौल बनाये जिससे हमारा देश, हमारी पीढ़ी, और हमारे अपने हम पर तथा अपने देश पर गर्व कर सकें क्योंकि -&lt;br /&gt;    `` we can not change anything unless we accept it ''&lt;br /&gt;                                                                  धन्यवाद&lt;br /&gt;                                                                            मुकेश कुमार पांडेय&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3617770739116937767-8661152770692969823?l=mukeshgkp.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/feeds/8661152770692969823/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2009/08/blog-post.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/8661152770692969823'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/8661152770692969823'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2009/08/blog-post.html' title='राजनीति में युवाओं की भागीदारी'/><author><name>mukesh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13668566544256037971</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/-wI9zXReltOU/TbKZvak746I/AAAAAAAAAQQ/yyW68uqMV8E/s220/asd.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3617770739116937767.post-4299122034096956628</id><published>2009-04-24T23:05:00.000-07:00</published><updated>2009-09-09T03:27:18.711-07:00</updated><title type='text'>देश के प्रति युवाओं का उत्तरदायित्व:</title><content type='html'>देश के प्रति युवाओं का उत्तरदायित्व ः&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दो अक्षरो से बना शब्द युवा जिसमे इतनी शक्‍ति, सहनशीलता और प्यार भरा हुआ, एक ऐसा उत्साह है, जिससे कोई भी, देश कोई भी समाज अपने आप को गार्वान्वित समझ सकता है । इसमें इतनी शक्‍ति है, जिससे किसी भी ताकत का मुकाबला किया जा सके । अगर हम इस शब्द पर ध्यान दें । या इसका समय पर प्रयोग करें तो यही युवा वायू बन जाती है । और आप वायु का अर्थ , एवं इसका उपयोग भी जानते है । वायु में इतनी शक्‍ति या ताकत होती है की यह प्राण वायु के रूप में हर जीव में विद्यमान होती है , तथा समय आने पर प्रलय भी लाती है ।&lt;br /&gt;किसी देश अथवा समाज की सबसे बड़ी सम्पत्ति है- मानव संसाधन और मानव संसाधन में सबसे उपयुक्‍त एवं भाग युवाओं का है । जिससे यह तो सिद्ध हो ही जाता है , कि युवा ही एकमात्र ऐसी क्षमता है, जिससे हम किसी भी बड़े से बड़े इमारत की नींव रख सकते है । और युवा रूपी नींव उस विकास को गगन-चूंम्बी इमारतों को जीवित भी रख सकती है । हम अधिक नही छोटी घटनाओं का उदाहरण देकर इसकी पृष्ठि कर सकते है- बात उन दिनों की है, जब हमारा देश अपना अस्तित्व, अपने संस्कार, अपना सबकुछ, यू कहे तो अपनी पहचान खो रहा था, उस समय भी युवाओं वे इसकी बागडोर संभाली देश को एक नयी पहचान दिलायी । वो युवा ही थे जिन्होंने बहुत कम समय में बड़ी सहजता से एक ऐसा सुत्र दे गये जो आने वाली नश्लों के लिये एक वरदान साबित हुआ है । वो इसी मिट्टी के बने मात्र २० से ३० साल के वीर सपुत थे जिन्होंने हंसते-हंसते देश के लिए, आने वाले वंशज, पीढ़ियो के लिए फाँसी को गले लगा लिया ।&lt;br /&gt;हम आज के युवा उनके बलिदानों को क्यों व्यर्थ जाने दें ? प्रश्न यह नही है हमारा देश तब गुलाम था, और आज हम आजाद है । प्रश्न यह है कि हम अपने देश व समाज को कुछ ऐसी पहचान दें जिससे हमारा समाज ही नही यहा का हर नागरिक अपने आप को इस देश में रहने का कार्य का, तथा देश के लिये किसी भी योगदान के लिये अपने आप पर गर्व कर सकें कि ‘ हम उस देश के वासी है, जिस देश मे, आज भी ‘अतुल्य भारत’, ‘अनेकता में एकता’, ‘अतिथिः देवो भवः’, जैसी चीज केवल पुस्तको में नही अपितु वास्तविक रूप से विद्यमान है ।&lt;br /&gt;हमारे देश में बहुत सारी कमियां भी है, जिसे दूर करना है । हमें संकल्प लेना है, कि जो गलतियां हमारे पूर्वजों ने की है, हम उसे कभी नही दोहरायेगें । हमें कसम है, इस देश के हर उन जवानो की जिन्होंने विभिन्‍न क्षेत्रों में अपना योगदान दिया है । मानता हूं, कि कोई भी देश पूर्ण नही होता लेकिन उसको पूर्ण बनाना हमारी जिम्मेदारी बनती है । इस देश में फैली हुई सभी सामाजिक बुराइयों पर विजय पाना है । अगर हम इस देश को उत्कृष्ठ बनाना चाहते है तो हमें उन तमाम सामाजिक बुराइयो को जड़ से समाप्त करना होगा । हम जानते है कि अगर इसे कोई कर सकता है तो वो और कोई नही बल्कि युवा है । क्योंकि इसमें बहुत ही धैर्य, प्यार, जोश और शक्‍ति की आवश्यकता होगी ।&lt;br /&gt;किसी भी समाज के विकास में शिक्षा काम बहुत बड़ा योगदान रहा है । क्योंकि जो युद्ध तलवार से नही जीती जा सकती वो कलम की ताकत पर जीती जा सकती है । जैसा की धर्मवीर भारती ने लिखा है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कलम देश की बड़ी शक्‍ति है , भाव जगाने वाली ।&lt;br /&gt;दिल ही नही दिमागों में भी आग लगाने वाली । ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हम सपथ ले कि हम ही इस देश के वर्तमान है । जिससे भविष्य का वो सारा दारोग्यदार है । जिस तरह मजधार में एक नाविक का उस पर बैठै सारे यात्रियों की जिम्मेदारी होती है हम उस भूत के लिये भी उतना ही उत्तरदायी है , जितनां भविष्य के लिये क्योंकि इस जग की नींव आज के उन लोगों द्वारा छेडी गयी है जो आज हमारे बीच नहीं है ।&lt;br /&gt;‘ आज के नौजवानों से हमारा यह आहवान है कि आप कोई कार्य करते हो चाहे शिक्षा के क्षेत्र में हो , खेल के क्षेत्र में हो या कला एवं मनोरंजन के क्षेत्र में हो आप को निष्ठावान एवं चरित्रवान होना पड़ेगा । स्वामी जी विवेकानंद ने कहा है, कि-&lt;br /&gt;“ विश्‍व का इतिहास मात्र कुछ लोगों द्वारा लिखा गया है । जो चरित्रवान है । ”&lt;br /&gt;और किसी भी महान कार्य को करने के लिये कठिन परिश्रम, समय एवं निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है । अगर इसमें कुछ लोग असफल भी हो जाते है तो उनकी परवाह न करते हुए निरंतर कठिन प्रयास से महान कार्य पूरे हो जाते हैं ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3617770739116937767-4299122034096956628?l=mukeshgkp.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/feeds/4299122034096956628/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2009/04/vande-mataram.html#comment-form' title='6 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/4299122034096956628'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3617770739116937767/posts/default/4299122034096956628'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mukeshgkp.blogspot.com/2009/04/vande-mataram.html' title='देश के प्रति युवाओं का उत्तरदायित्व:'/><author><name>mukesh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13668566544256037971</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/-wI9zXReltOU/TbKZvak746I/AAAAAAAAAQQ/yyW68uqMV8E/s220/asd.jpg'/></author><thr:total>6</thr:total></entry></feed>
